लगातार छींक आते रहना, नाक बंद होने के कारण सांस लेने में दिक्कत महसूस होने जैसे लक्षण साइनोसाइटिस का संकेत हो सकते हैं। यह काफी असहज कर देने वाली स्थिति मानी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हमारी नाक और सिर के बीच कुछ स्थान रिक्त होता है, इसमें सूजन आ जाने की स्थिति साइनोसाइटिस की समस्या का कारण बन सकती है। सूजन की यह समस्या कुछ लोगों में कई महीनों तक भी बनी रह सकती है।
Yoga Tips: क्यों होती है साइनोसाइटिस? विशेषज्ञों ने बताया- इन योगासनों के अभ्यास से पा सकते हैं इसमें आराम
अधोमुख शवासन योग से पा सकते हैं आराम
अधोमुख शवासन योग कई प्रकार से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में लाभकारी हो सकता है। योग विशेषज्ञ कहते हैं साइनोसाइटिस की समस्या से परेशान लोगों को इस योग से विशेष लाभ मिलता है। रक्त परिसंचरण को सुधारने, अवरुद्ध चैनलों को खोलने और पूरे शरीर के तनाव को दूर करने में इस योग के नियमित अभ्यास के लाभ देखे गए हैं। यह न केवल गर्दन की स्ट्रेचिंग करता है साथ ही नेजल कैविटी को भी कम करता है, ऐसे में इसे साइनस से राहत पाने वाले अभ्यास के तौर पर जाना जाता है।
शलभासन योग का करिए अभ्यास
शलभासन योग हाथों, जांघों, पैरों और छाती को मजबूती प्रदान करने वाले योगाभ्यास के तौर पर जाना जाता है। विशेषज्ञ इसे "मदर ऑफ़ ऑल पोज़" के रूप में वर्णित करते हैं। यह पोज़ नसों को आराम देने और मन को शांत करने के लिए बेहद फायदेमंद है। यह न केवल साइनोसाइटिस और अन्य एलर्जी की स्थिति से राहत प्रदान करता है, बल्कि अनिद्रा और चिड़चिड़ापन को भी कम करता है। फेफड़ों में रक्त के प्रवाह को ठीक करके शरीर को संक्रमण से बचाने में भी इस योग के लाभ देखे गए हैं।
मत्स्यासन योग से पा सकते हैं आराम
मत्स्यासन योग, फेफड़ों और सांस की समस्याओं को दूर करने वाले सबसे प्रभावी योगाभ्यासों में से एक है। फेफड़ों की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग के साथ यह गहरी सांस लेने को बढ़ावा देने वाला आसन है। साइनोसाइटिस से राहत प्रदान करने के लिए यह छाती और गले के भीतर के अवरुद्ध चैनलों को खोलता है।
एलर्जी की स्थिति से राहत दिलाने, रक्त परिसंचरण को बढ़ाने और समग्र प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करने में इस योगासन के लाभ देखे गए हैं।
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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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