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आखिर क्यों दूध से दूर होते जा रहे हैं हम, क्या सच में से इसे पीने से बढ़ रही हैं बीमारियां?
नंद राम
Updated Mon, 25 Jun 2018 09:11 AM IST
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डेमो
- फोटो : डेंमो
दूध को लेकर धारणाएं बदल रही हैं। दुनिया भर में दूध का सबसे ज्यादा उत्पादन और उपभोग करने वाले भारत में दूध और उससे बनने वाले डेयरी उत्पादों पर लोगों का विश्वास कम हो रहा है। सवाल यह है कि क्या गुणवत्तापूर्ण दूसरे विकल्प की वजह से हम लोग दूध से दूर हो रहे हैं या फिर कोई और कारण है?
banana milk combination
कुछ दिन पहले जब सऊदी अरब ने कतर को दूध निर्यात करने से मना कर दिया था, तो कतर ने खुद ही दूध का उत्पादन करने की योजना पर काम करना शुरू किया। दूध के बिना कोई देश जी नहीं सकता। सदियों से दूध और उससे बने उत्पादों को हमारे स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा पौष्टिक माना जाता रहा है और हमारे आहार में दूध या इससे संबंधी खाद्य पदार्थ जरूर शामिल रहते हैं। यहां तक कि हम दूध के बिना किसी चीज की कल्पना भी नहीं कर सकते। चाहे वह मसाला चाय हो, खीर हो, घी हो या पनीर। सभी में दूध प्रमुख तत्व होता है। लेकिन अब यह धारणा धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। खबर यह है कि लोग दूध से दूर होते जा रहे हैं। लोगों को अपने स्वास्थ्य को लेकर जो भरोसा दूध पर था, वह टूटता हुआ दिखाई देता है, लेकिन क्यों?
डेमो
- फोटो : डेंमो
जानकार पहला कारण तो यह बताते हैं कि तेजी से बढ़ती मांग के बीच दूध की गुणवत्ता को बरकरार रखने में हम कामयाब नहीं हैं। हालांकि, आज भी ज्यादातर घरों में सुबह-सुबह नाश्ते के समय, शाम या रात को सोते समय बच्चों को दूध पीने के लिए जोर दिया जाता है। लेकिन सवाल उठने लगे हैं कि क्या दूध हमारी सेहत के लिए आज भी उतना ही फायदेमंद है, जैसा कि पहले था।
कुछ साल पहले ‘द जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन’ में प्रकाशित एक शोध की रिपोर्ट पर दुनिया भर के लोगों की नजरें गई थीं। रिपोर्ट में कहा गया था कि आजकल दूध के उपभोग से पाचन, हड्डियों, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियां हो रही हैं। इस रिपोर्ट के बाद लोगों ने दूध पीना छोड़ा तो नहीं, लेकिन दूध से दूरी तो बढ़ी।
कुछ साल पहले ‘द जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन’ में प्रकाशित एक शोध की रिपोर्ट पर दुनिया भर के लोगों की नजरें गई थीं। रिपोर्ट में कहा गया था कि आजकल दूध के उपभोग से पाचन, हड्डियों, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियां हो रही हैं। इस रिपोर्ट के बाद लोगों ने दूध पीना छोड़ा तो नहीं, लेकिन दूध से दूरी तो बढ़ी।
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कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ तो यह कहने लगे कि डेयरी उत्पादों को कम करने से बीमारियों से बचा जा सकता है। कई अन्य अध्ययनों में भी दूध और उससे बने उत्पादों का संबंध मुंहासों के होने से पाया गया था। मुंबई में ‘द एजलेस क्लीनिक’ की हर्षना बिजलानी कहती हैं कि जिन लोगों ने डेयरी उत्पादों का सेवन कम किया है, उनमें त्वचा संबंधी परेशानी में सुधार आया। वह कहती हैं कि यदि आपको मुंहासों का कारण समझ में नहीं आ रहा है या यदि आप हार्मोनल असंतुलन से पीड़ित हैं, तो आप डेयरी उत्पादों का उपभोग कम करें। आपको एक महीने में अंतर दिखने लगेगा।
दूसरी ओर नई दिल्ली के एम्स में डाइटिशियन डॉ. वसुंधरा सिंह कहती हैं, ''हो सकता है कि दूध में मिलावट की वजह से किसी के साथ ऐसा हो गया हो, लेकिन अभी तक इस तरह की गंभीर परेशानी देखने को नहीं मिली है।'' डेयरी उत्पादों में मिलावट से परेशानी की बात मुंबई में मैक्रोबायोटिक न्यूट्रीशनिस्ट और शेफ सोनाली सभरवाल भी कहती हैं, “आज हम जिन डेयरी उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं, उनकी गुणवत्ता वैसी नहीं है, जैसी हमसे पहले की पीढ़ियों के समय में होती थी। अब जब दूध के पाश्चुराइजेशन या होमोजेनाइजेशन किए जाने के दौरान, इसमें पाई जाने वाली स्वास्थ्यवर्धक चीजें नष्ट हो जाती हैं, तो फायदे नजर नहीं आते।”
दूसरी ओर नई दिल्ली के एम्स में डाइटिशियन डॉ. वसुंधरा सिंह कहती हैं, ''हो सकता है कि दूध में मिलावट की वजह से किसी के साथ ऐसा हो गया हो, लेकिन अभी तक इस तरह की गंभीर परेशानी देखने को नहीं मिली है।'' डेयरी उत्पादों में मिलावट से परेशानी की बात मुंबई में मैक्रोबायोटिक न्यूट्रीशनिस्ट और शेफ सोनाली सभरवाल भी कहती हैं, “आज हम जिन डेयरी उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं, उनकी गुणवत्ता वैसी नहीं है, जैसी हमसे पहले की पीढ़ियों के समय में होती थी। अब जब दूध के पाश्चुराइजेशन या होमोजेनाइजेशन किए जाने के दौरान, इसमें पाई जाने वाली स्वास्थ्यवर्धक चीजें नष्ट हो जाती हैं, तो फायदे नजर नहीं आते।”