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योग करने वालों के आस-पास आपने नोटिस किए ये 5 निशान?
amarujala.com- Presented by: हर्षिता
Updated Wed, 21 Jun 2017 12:15 PM IST
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Yoga
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हो सकता है आप ने हाल ही में योग क्लासेज लेनी शुरू की हो। ये भी हो सकता है कि आपने अभी तक इसे अपनी फिटनेस रूटीन में शामिल न किया हो।लेकिन योग करने वालों के आसपास आपने कुछ सिम्बल्स ज़रूर देखे होंगे। अगली स्लाइड में जाने आखिर क्यों मिली है उन्हें विशेष जगह...
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- फोटो : Yogi Approved
हमसा
ईसाई से लेकर यहूदियों तक, इस्लाम से लेकर बौध धर्म के अनुयायियों के बीच यह चिह्न अपना महत्व रखता है. खुली हथेली और एक नेत्र वाले इस निशान में मौजूद हर उंगली कुछ दर्शाती है।
अंगूठा: अग्नि
तर्जनी: वायु
मध्यमा: आकाश
अनामिका: पृथ्वी
कनिष्टिका: जल का सूचक है. कहा गया है कि हमारा शरीर भी इन्हीं पंचतत्वों से बना है। ये सब मिलकर शरीर में ऊर्चा का संचार करते हैं। यही वजह है कि योग में भी इस चिह्न को खास स्थान हासिल है। वहीं 'नेत्र' बुरी चीज़ों के प्रति सचेत रहने का संदेश देता है।
ईसाई से लेकर यहूदियों तक, इस्लाम से लेकर बौध धर्म के अनुयायियों के बीच यह चिह्न अपना महत्व रखता है. खुली हथेली और एक नेत्र वाले इस निशान में मौजूद हर उंगली कुछ दर्शाती है।
अंगूठा: अग्नि
तर्जनी: वायु
मध्यमा: आकाश
अनामिका: पृथ्वी
कनिष्टिका: जल का सूचक है. कहा गया है कि हमारा शरीर भी इन्हीं पंचतत्वों से बना है। ये सब मिलकर शरीर में ऊर्चा का संचार करते हैं। यही वजह है कि योग में भी इस चिह्न को खास स्थान हासिल है। वहीं 'नेत्र' बुरी चीज़ों के प्रति सचेत रहने का संदेश देता है।
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मंडला
इन्हें ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। मेडिटेशन के दौरान इसका इस्तेमाल एकाग्रता बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह कई रंगों में उपल्बध होते हैं।
इन्हें ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। मेडिटेशन के दौरान इसका इस्तेमाल एकाग्रता बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह कई रंगों में उपल्बध होते हैं।
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बुद्धा
संस्कृत के अनुसार, जो प्रबुध है वो ही बुद्ध है। यह ध्यान, चिंतन, जीवनशैली, एकाग्रता और शांति का प्रतीक है। योग की अहमियत इन्ही लक्ष्यों में समाहित है। यही वजह है कि योग क्लासेज में भगवान बुद्ध की तस्वीर या मूर्ति ज़रूर रखी जाती है।
संस्कृत के अनुसार, जो प्रबुध है वो ही बुद्ध है। यह ध्यान, चिंतन, जीवनशैली, एकाग्रता और शांति का प्रतीक है। योग की अहमियत इन्ही लक्ष्यों में समाहित है। यही वजह है कि योग क्लासेज में भगवान बुद्ध की तस्वीर या मूर्ति ज़रूर रखी जाती है।
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ऊँ
आर्ट ऑफ लिविंग में भरोसा रखने वाला कोई भी शख्स इस चिह्न से अछूता नहीं है। तीन अक्षर से बना यह शब्द ब्रह्मांड की अखंडता का प्रतीक है। 'अ' उत्पत्ति का सूचक है, 'उ' का मतलब है उठना यानी विकास करना और 'म' का अर्थ है मौन यानी विलीन हो जाना। इस मंत्र के उच्चारण से गले में कंपन होती है जो थायरॉयड की बीमारी में फायदेमंद साबित होता है। इसके अलावा तनाव कम करने से लेकर पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए भी इस मंत्र के जाप की सलाह दी जाती है।
आर्ट ऑफ लिविंग में भरोसा रखने वाला कोई भी शख्स इस चिह्न से अछूता नहीं है। तीन अक्षर से बना यह शब्द ब्रह्मांड की अखंडता का प्रतीक है। 'अ' उत्पत्ति का सूचक है, 'उ' का मतलब है उठना यानी विकास करना और 'म' का अर्थ है मौन यानी विलीन हो जाना। इस मंत्र के उच्चारण से गले में कंपन होती है जो थायरॉयड की बीमारी में फायदेमंद साबित होता है। इसके अलावा तनाव कम करने से लेकर पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए भी इस मंत्र के जाप की सलाह दी जाती है।