पिछले दो दशकों में तमाम तरह के कैंसर के मामलों में इजाफा देखा गया है। इसमें भी स्तन कैंसर के केस सबसे तेजी से बढ़े हैं। अमेरिकी महिलाओं में यह सबसे आम कैंसर बन गया है, आंकड़ों से पता चलता है कि हर 8 में से 1 महिला इस कैंसर का शिकार हो जाती है। स्तन कैंसर, अन्य प्रकार के ही कैंसर की तरह जानलेवा माना जाता है, इससे बचाव बहुत आवश्यक होता है।
आज का योग: ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं यह योगासन, आप भी कीजिए रोजाना अभ्यास
कैट काउ पोज
ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए कैट काउ पोज का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। यह पीठ के निचले हिस्से को मजबूती देने के साथ कूल्हे के दर्द को कम करने और रीढ़ की गतिशीलता के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी में द्रव परिसंचरण को बढ़ाता है। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले अपनी कलाइयों और घुटनों की मदद से चौपाया जानवरों जैसी मुद्र बना लें। अब गहरी श्वास लें और छोड़ें। इसके बाद सांस लेते हुए छत की ओर देखें और सांस छोड़ें। इस योग को रोजाना 5-10 मिनट तक करें।
मत्स्यासन पोज
मत्स्यासन योग को हार्ट ओपनर योग भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यह आपकी छाती, पसलियों, फेफड़े और पीठ के ऊपरी हिस्से को खोलती है। यह स्तनों और पेक्स में लिंफेटिक ड्रेनेज को उत्तेजित करके ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है। योग विशेषज्ञों के मुताबिक इस योग के नियमित अभ्यास से इम्यूनिटी को भी बढ़ाया जा सकता है, जो कैंसर को जोखिम को कम करती है।
प्राणायाम
गहरी सांस लेने वाले योग आपके डायाफ्राम का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने में मदद करते हैं। डायाफ्राम को मजबूत करके ऑक्सीजन के संचार को बढ़ाया जा सकता है। स्तन कैंसर के उपचार के दौरान और बाद में भी इसका अभ्यास करना फायदेमंद हो सकता है। गहरी सांस लेने से मन को शांत करने में मदद मिलती है। महिलाओं को इसका नियमित अभ्यास जरूर करना चाहिए।
------------------
नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।