दूध के सेवन से हमारे शरीर को कई सारे फायदे पहुंचते हैं। दूध से हमें कई सारे आवश्यक पौषक तत्व मिलते हैं। दूध के महत्व को समझने और इसे व्यर्थ न जाने देने के लिए, इसके फायदों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में आज भी कई सारे लोग ऐसे हैं, जिन्हें दूध नहीं मिल पाता है जिससे कि उनके शरीर में पोषण की कमी रह जाती है। अगली स्लाइड्स से जानिए विश्व दुग्ध दिवस का इतिहास, महत्व एवं अन्य जानकारी।
World Milk Day 2021: जानिए विश्व दुग्ध दिवस का इतिहास, महत्व, विषय एवं इससे जुड़ा सबकुछ
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विश्व दुग्ध दिवस का इतिहास
इस दिन को मनाने की शुरुआत सन् 2001 में हुई थी। इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के खाद्य औऱ कृषि संगठन विभाग द्वारा की गई थी। विश्व दुग्ध दिवस में पिछले सालों में 70 से अधिक देश भाग ले रहे हैं। इन देशों में दूध के महत्व को समझने के लिए कई सारे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। भारत में 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाया जाता है।
इस तरह मनाया जाता है
प्रतिवर्ष विश्व दुग्ध दिवस पर अलग-अलग देशों में कई सारे कार्यक्रमों का आयोजन होता है। दूध के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए रैलियां निकाली जाती है लेकिन कोरोना के कारण इस तरह की किसी गतिविधि का फिलहाल कोई आयोजन नहीं हो पा रहा है। विश्व दुग्ध दिवस पर ऑनलाइन चर्चाओं का आयोजन जरूर होगा।
विश्व दुग्ध दिवस 2021 का विषय
इस वष विश्व दुग्ध दिवस की थीम 'पर्यावरण, पोषण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ डेयरी क्षेत्र में स्थिरता' पर केंद्रित होगी। विषय का उद्देश्य नियमित रूप से आहार में दूध और डेयरी उत्पादों को शामिल करने के बारे में जागरूकता फैलाना है ताकि लोगों का स्वास्थ्य बेहतर रह सके और दूध का सही उपयोग हो सके।
दूध में कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो कि शरीर के लिए बहुत आवश्यक होते हैं। इसमें विटामिन- ई, डी, के और ए पाया जाता है। साथ ही मैग्नीशियम, आयोडीन, फॉस्फोरस, कैल्शियम, राइबोफ्लैविन भी दूध में पाए जाते हैं इसलिए बचपन से ही दूध का सेवन करवाया जाता है और बुजुर्गों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी इसका सेवन आवश्यक होता है।