पिछले सालों में न जाने हमने कितने ही वृक्ष काटे होंगे और न जाने किन-किन तरीकों से पर्यावरण को दूषित किया होगा जिसका परिणाम आज हम सभी के सामने हैं। प्रकृति को मनुष्य की आवश्यकता नहीं है बल्कि मनुष्य प्रकृति के बिना अधूरा है, यह बात बोलने- सुनने में तो बहुत आती है लेकिन इसे आत्मसात कम ही लोगों ने किया है। पर्यावरण को जब बचाने की बात आती है तो लोग कर्म के सिद्धांत तक पहुंच ही नहीं पाते हैं लेकिन हमारे छोटे -छोटे प्रयत्न भी पर्यावरण को बचाने में बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि हम पर्यावरण के प्रति कोई आत्मीयता रखते हैं तो हमें कोई बहुत बड़ा या महान कार्य नहीं करना होगा। हमें अपने जीवन में छोटे-छोटे अपितु अर्थपूर्ण बदलावों को शामिल करना होगा और महान काम अपने आप हो जाएगा। छोटे-छोटे बदलाव मिलकर एक बड़ा बदलाव लाने में सक्षम होते हैं, इस बात को भूलना नहीं है। अगली स्लाइड्स से जानिए अपनी जीवनचर्या में किन बातों को शामिल करके हम पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूरण योगदान दे सकते हैं।
कोरोना महामारी और पर्यावरण के सबक: इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाकर बचाया जा सकता है पर्यावरण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बोतल लेकर निकलें
यदि आप कहीं जा रहे हैं तो घर से अपनी एक बोतल भरकर निकलें। यदि आप खुद की बोतल साथ लेकर निकलेंगे तो प्यास लगने पर आपको रास्ते से प्लास्टिक की बोतल नहीं खरीदना होगी और यदि उसका पानी खत्म भी हो जाता है तो आप उसे फिर से भर सकते हैं लेकिन यदि आपके पास बोतल नहीं होगी तो आपको हरबार एक नई प्लास्टिक की बोतल खरीदना होगी। हरबार नई प्लास्टिक की बोतल खरीदकर उसे फेंक देने से पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचता है इसलिए अपनी आदत में इस तरह से बदलाव करें।
कपड़े की थैली लेकर निकलें
घर से जब भी बाहर निकल रहे हैं तो अपने साथ एक कपड़े की थैली लेकर निकलें। कपड़े की थैली लेकर निकलने से फायदा यह होगा कि रास्ते में यदि आपको यदि कुछ खरीदना का विचार आ जाता है तो आपको प्लास्टिक की थैली का उपयोग नहीं करना होगा, आप अपने साथ जो कपड़े की थैली है, उसमें आसानी से सामान को ला सकेंगे। ऐसे में आप प्लास्टिक की थैली का उपयोग करने से बच जाएंगे इसलिए कपड़े की एक थैली हमेशा अपनी पॉकेट या गाड़ी में रखें।
थोड़ी दूर पैदल चलें
हम सभी मशीनों पर इतने अधिक निर्भर हो गए हैं कि हमको कभी भी, कहीं भी थोड़ी दूर यदि जाना होता है तो हम गाड़ी का सहारा लेते हैं। यदि थोड़ी दूर जाने के लिए हम गाड़ी का इस्तेमाल न करते हुए खुद से ही जाएंगे तो पर्यावरण को थोड़ा ही सही पर प्रदूषण मुक्त करने में हम अपना कुछ तो योगदान दे ही सकेंगे। साथ ही अपनी सेहत और शरीर के प्रति भी कुछ निभा सकेंगे इसलिए आवश्यकता न होने पर गाड़ी का इस्तेमाल न करें।
विशेष दिन पर पर्यावरण को न भूलें
हमारे और हमारे अपनों के जीवन में जन्मदिन और सालगिरह के अवसर पर कई सारे ऐसे खास दिन आते हैं जिन्हें हम किसी न किसी तरह से यादगार बनाने का प्रयत्न करते हैं क्यों न ऐसे दिनों पर हम उन्हें पौधा भेंट करके या खुद से पौधा देकर खास बनाएं। ऐसा करके हम कहीं न कहीं पर्यावरण के लिए भी थोड़ा ही सही पर कुछ काम आ सकेंगे और साल में यदि परिवार में 8 से 10 खास दिन आते हैं तो इसी बहाने हम इतने पौधे लगा सकेंगे। आने वाले समय में यही पौधे पेड़ बनकर पर्यावरण को संपन्न बनाएंगे।