सफर हमेशा सुकून देता है, नए रास्तों, नई गलियों की खोज करना सिखाता है। सफर में हवा, पंछी, नदियां, पहाड़, खेत, गाँव, सभी संगी-साथी होते हैं। अगर जीवन को नए और सार्थक तरीके से जीना है तो सफर एक बहुत ही अच्छा विकल्प है। फिर चाहे परिवार साथ हो, दोस्त हों या अकेले खुद आप। यात्राओं का आनंद लेने का सबका अपना तरीका होता है। समय समय पर इसमें बदलाव भी होते रहते हैं। जैसे आजकल टू व्हीलर यात्रा एडवेंचर का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसके लिए साधन भी लगभग हर जगह मौजूद हैं और लोग इसे पसंद भी बहुत कर रहे हैं।
Trip on Two- Wheeler: दो पहिया पर घूमने निकले हैं, इन बातों का रखें ख्याल
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फिटनेस है एक बड़ी ताकत
चाहे आप सोलो ट्रैवल कर रहे हों या ग्रुप में। अगर आपका साधन दुपहिया है तो आपको अपनी फिटनेस पर भी अतिरिक्त ध्यान देना होगा। जोश जोश में आप यात्रा पर तो निकल पड़ते हैं लेकिन लम्बी दूरी तक दो पहिया चलाना एक टफ टास्क होता है। इसके लिए आपकी मांसपेशियों का लचीला होना, हड्डियों का मजबूत होना, पाचन और नींद का दुरुस्त होना सबकुछ जरूरी है। इसलिए ही बाइक एक्पीडिशन आदि के पहले ट्रेनिंग दी जाती है और फिटेनस टेस्ट भी करवाए जाते हैं। तो अगर आप लम्बी दूरी के लिए टू व्हीलर पर यात्रा करने का सोच रहे हैं तो करीब 3-4 महीने पहले से योग, स्ट्रेचिंग, कार्डियो ट्रेनिंग, डीप ब्रीदिंग अभ्यास अवश्य शुरू कर दें। इसके साथ ही अपने खान-पान में भी अतिरिक्त पोषण शामिल करें और भरपूर नींद लेने की आदत डालें।
शरीर और दिमाग को दें ब्रेक
चाहे आप दो पहिया वाहन चला कर यात्रा कर रहे हों या चार पहिया, आपको अपने शरीर और दिमाग दोनों को ही समय समय पर ब्रेक देना जरूरी है। साथ ही पूरी सेफ्टी के साथ ड्राइव करें। आंकड़े बताते हैं कि हमारे देश में बड़ी संख्या में हर साल जितने लोग गंभीर बीमारियों से नहीं मरते उससे कहीं ज्यादा सड़क दुर्घटना में जान गंवा देते हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो दूसरों की गलती की वजह से इसलिए जान खो बैठते हैं क्योंकि उन्होंने सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं किया। इसी तरह यदि आप बिना रुके, शरीर की आराम चाहने की आवाज़ को बिना सुने चलते जाते हैं तो भी दुर्घटना की आशंका बढ़ती है। इसलिए शरीर और दिमाग दोनों को बीच बीच में ब्रेक दें।
तकनीकी प्रशिक्षण
कोई ऐसी जगह जाते हुए जहाँ मीलों तक कोई मैकेनिक क्या दूसरा इंसान भी न दिखाई दे रहा हो, यदि आपका दुपहिया बंद हो जाए या उसमें कोई दिक्कत आ जाये तो आप क्या करेंगे। इसलिए यात्रा पर निकलने से पहले ही अपने वाहन से जुड़े छोटे-मोटे काम और टूल्स का उपयोग जरूर सीखें। आप इसके लिए कोई वर्कशॉप भी ज्वाइन कर सकते हैं या चाहें तो जिस जगह से आप अपने वाहन की नियमित सर्विसिंग करवाते हैं, वहां से बारीकियां सीखें। साथ ही उन छोटे ऑटो पार्ट्स की भी जानकारी लें जिन्हें वक्त पड़ने पर बदलने की आवश्यकता हो सकती है। इससे आपको स्टेपनी चेंज करने, छोटी-मोटी रिपेयरिंग करने में दिक्कत नहीं आएँगी, कोई गैरेज वाला आपसे मनचाहे पैसे भी नहीं वसूल पायेगा और आप निर्बाध अपना सफर पूरा कर सकेंगे।
नियम और कानूनों को जानें
सड़क पर चलने वाले पैदल व्यक्ति से लेकर हर तरह के वाहन चालकों तक के लिए कुछ नियम होते हैं। इसी तरह हर राज्य और सीमा में भी वाहन चालकों के लिए नियम बदलते हैं। आपकी यात्रा के दौरान कितने राज्य बीच में आएंगे और वहां के नियम कानून क्या हैं, इनकी पूरी जानकारी हार्ड या सॉफ्ट कॉपी के रूप में साथ लेकर चलें। इसके अलावा एनओसी (जरूरी हो तो), आपके सभी जरूरी आईडी कार्ड्स, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस व ड्राइविंग लायसेंस, आदि भी कम्प्लीट और रिन्यू करवाकर चलें। रास्ते में जहाँ-जहाँ आपको रुकना है वहां से संबंधित नियमों की भी पूरी जानकारी लें। हालांकि आजकल मोबाइल एक ऐसा गैजेट है जिसपर आप दुनियाभर की जानकारी पा सकते हैं लेकिन अपने जरूरी डॉक्युमेंट्स के साथ ही यात्रा की सभी लोकेशंस की जानकारी और नक्शा हार्ड कॉपी के रूप में भी साथ रखें।