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सावन 2019ः जानिए क्यों खास है तुंगनाथ मंदिर, जहां अध्यात्म के साथ प्राकृतिक खूबसूरती का मिलेगा नजारा

Fri, 19 Jul 2019 01:41 PM IST
प्रशांत राय लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत राय Updated Fri, 19 Jul 2019 01:41 PM IST
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sawan 2019 tungnath temple in uttrakhand

सावन का पावन पर्व शुरू हो चुका है। देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया है। अगर आप भी भोलेनाथ के भक्त हैं और सावन के इस खास महीने में भगवान शंकर की कृपा पाना चाहते हैं तो इस मंदिर पर जरुर मत्था टेकें। जिस मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं वह मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर है। आइए जानते हैं तुंगनाथ मंदिर के बारे में। 

sawan 2019 tungnath temple in uttrakhand

पंच केदारों में से एक तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचाई पर मौजूद शिव मंदिर है। यह शिव मंदिर तुंगनाथ माउंटेन रेंज में समुद्र तल से 3680 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण धनुधर अर्जुन ने किया था। तुंगनाथ का शाब्दिक अर्थ होता है पीक के भगवान। 

sawan 2019 tungnath temple in uttrakhand
- फोटो : AmarUjala

तुंगनाथ मंदिर में भगवान शिव के हाथ की पूजा की जाती है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर नंदी बैल की पत्थर की मूर्ति है, जो पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान शिव के सवारी हैं। इसके अलावा अलग-अलग देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर इस मंदिर के आसपास आपको मिल जाएंगे। तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का स्रोत है, जिनसे अक्षकामिनी नदी बनती है। मंदिर रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है और चोपता से तीन किलोमीटर दूर स्थित है।

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sawan 2019 tungnath temple in uttrakhand

सर्दियों के वक्त बर्फ पड़ने की वजह से शिवलिंग को यहां से चोपता लाया जाता है। इस दौरान ग्रामीण पूरे ढोल के साथ शिव को ले जाते हैं और गर्मियों में वापस रखते हैं। ब्रिटिश शासनकाल में कमिश्नर एटकिन्सन ने कहा था कि जिसने अपने जीवन में चोपता नहीं देखा, उसका जीवन व्यर्थ है।

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पुराणों के मुताबिक रामचंद्र शिव को अपना भगवान मानकर पूजते थे। कहा जाता है कि लंकापति रावण का वध करने के बाद प्रभु श्रीराम ने तुंगनाथ से डेढ़ किलोमीटर दूर चंद्रशिला पर आकर ध्यान किया था। रामचंद्र ने यहां कुछ वक्त बिताया था। 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित चंद्रशिला पहुंचकर आप विराट हिमालय की सुदंर छटा का आनंद ले सकते हैं।

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