अपने देश में लोग अपने पसंद के अनुसार यात्राएं करते हैं।बहुत से लोगों को एडवेंचर पसंद होता है, बहुतों को प्राकृतिक जगहें पसंद होती है। बहुतों को पहाड़ पसंद होते हैं तो बहुतों को समंदर किनारे या आइलैंड। देश में धार्मिक यात्राएं करने वाले लोगों की भी एक बड़ी तादाद है। ऐसे लोगों की ट्रैवल डायरी में उत्तर प्रदेश के काशी यानी कि वाराणसी की यात्रा करना जरूर शामिल होता है। उत्तर भारत में जैसे काशी जैसा पवित्र तीर्थस्थल है, वैसे ही दक्षिण भारत में भी कई महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। आज जिस जगह के बारे में हम बताने जा रहे हैं, उसे दक्षिण भारत का काशी कहा जाता है। आइए, जानते हैं इस बारे में विस्तार से:
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- फोटो : Insta@Ankita Chaudhary
हम बात कर रहे हैं अरब सागर किनारे स्थित कर्नाटक के एक खास शहर गोकर्ण की। इसे लोग भारत का दूसरा काशी कहते हैं। गोकर्ण एक हिंदू तीर्थस्थल है, जहां महाबलेश्वर मंदिर और कोटि तीर्थ सहित कई पवित्र स्थल हैं। गोकर्ण को अक्सर कम भीड़ वाला गोवा भी कहा जाता है। कारण कि यहां कई आकर्षक समुद्र तट हैं, जहां आप सुकून से कुछ समय बिता सकते हैं। आराम करने के लिए यहां के 'बीच' आकर्षण का केंद्र होते हैं।
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Gokarna
- फोटो : Social Media
इस स्थान की खासियत है कि यह दो नदियों के ऐसे संगम पर बसा है जो देखने से गाय के कान के समान लगता है जिसकी वजह से इसे गोकर्ण नाम दिया गया है। यहां के प्रमुख आकर्षणों की बात करें तो महाबलेश्वर मंदिर और कोटि तीर्थ के अलावा महागणपति का मंदिर, भद्रकाली मंदिर, वारादराज मंदिर और वेंकटरमण मंदिर, ओम बीच, कुडले बीच, गोकर्ण बीच, याना, हाफ मून बीच और पैराडाइज बीच जैसी जगहें हैं।
यहां की कथा है अद्भुत
कहा जाता है कि यहां पर बने सबसे प्राचीन मंदिर महाबलेश्वर स्थित शिवलिंग दैत्यराज रावण के द्वारा लाई गई थी। इस बारे में बड़ी ही रोचक कथा हैप्रचलित है कि रावण भगवान शंकर को प्रसन्न करके अजेय शक्तियां प्राप्त करके उस शिवलिंग को अपने साथ लंका ले जाना चाहता था। लेकिन रावण की इस योजना से घबराकर देवताओं ने प्रार्थना की और ईश्वर की कुछ ऐसी लीला हुई कि रावण को यह शिवलिंग यहीं रखना पड़ा। तब से यह शिवलिंग यहीं पर स्थापित है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
बहुत खूबसूरत है यह शहर
गोकर्ण में और भी बहुत खूबसूरत प्राकृतिक नजारों का दीदार कर सकते हैं। यहां का कुडेल तट तो अद्भुत है। यहां के सभी समुद्री तटों में सबसे बड़ा तट है ये। इसके साथ ही ओम तट भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह हिंदू धर्म के प्रतीक ओम की आकृति के समान है।