जितना पवित्र मंदिर होता है उतना ही पवित्र माना जाता है शादी का बंधन। तो फिर जाहिर है मंदिर और विवाह का एक अनूठा रिश्ता होता है। भारत में पारंपरिक तौर पर अधिकांश लोग मंदिर में शादी करना पसंद करते हैं। हर किसी को शोर-शराबा पसंद नहीं होता है। हमारे देश में मंदिरों को आध्यात्मिकता का केंद्र माना जाता है और अपने शादी के नए सफर की शुरुआत करने के लिए ईश्वर का आशीर्वाद भी मिल जाता है। तो अगर आप मंदिर में सादी करने का फैसला कर रहे हैं तो इन मंदिरों पर जरुर ध्यान दें।
विवाह के लिए भारत के ये 4 बेहतरीन मंदिर, होगा आध्यात्मिक अहसास
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इस्कान टेम्पल
इस्कान टेम्पल को राधा पार्थसारथी मंदिर भी कहते हैं। इस मंदिर में राम, सीता, कृष्ण और राधा की मूर्तियां विराजमान हैं। हरे कृष्ण हिल पर स्थित ये वास्तुकला का नायाब नमूना नब्बे फीट ऊंचा है। इसकी दिवारों पर श्री कृष्ण की तस्वीरें सजी हुई हैं। इस मंदिर में आपको विवाह के कार्यक्रम के लिए सही वातावरण, आध्यात्मिक एहसास होगा। यह मंदिर दिल्ली के संत नगर मेन रोड, हरे कृष्ण, ईस्ट ऑफ कैलाश नई दिल्ली में स्थित है।
तिरुमाला मंदिर
तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम मंदिर अपनी आर्थिक समृद्धि और लोकप्रियता के चलते पूरे देश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में पूरी दुनिया से लोग मन्नतें मांगने आते हैं। इस तरह के धार्मिक माहौल में शादी करना किसी पांच सितारे होटल में शादी करने से लाख गुना ज्यादा अच्छा है। यहां लोग दान चढ़ाने आते हैं, सेहत मांगने आते हैं और कुछ लोग शादी करने आते हैं। यह मंदिर एस माडा सेंट, तिरुपति, आंध्र प्रदेश में मौजूद है।
त्रियुगीनारायण मंदिर
भारत में एक ऐसा मंदिर है जहां साक्षात शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। अब इस मंदिर में विवाह किए जा सकते हैं। उत्तराखंड के इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां शादी करने वाले जोड़े की जिंदगी संवर जाती है। इसी मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। आज भी इनकी शादी की निशानियां यहां मौजूद हैं। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में त्रियुगी नारायण मंदिर स्थित है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के इस मंदिर को शिव पार्वती के विवाह स्थल के रूप में जाना जाता है।
मतंगेश्वर मंदिर
ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मध्यप्रदेश में कई ऐसे मंदिर हैं जो अध्यात्मिक रूप से संपन्न होने के कारण शादी के बंधन में जुड़ने वाले जोड़ों के लिए सही जगह है। मतंगेश्वर मंदिर में विवाह करने का अर्थ है इस मंदिर के सालों पुराने एतिहासिक पलों से जुड़ जाना और उन्हें अपने जीवन में भी जोड़ लेना।