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एक किन्नर से शादी करने वाले मर्द की कहानी

Tue, 15 Oct 2019 07:33 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 15 Oct 2019 07:33 PM IST
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The story of a man marrying a eunuch
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

आम लोगों को भी यही लगता है कि किन्नर पैसे वाले होते हैं। वो शौक से रहते हैं। उनके पास मुफ्त का पैसा होता है और पारिवारिक जिम्मेदारियां कुछ होती नहीं। लेकिन ये लोगों की गलतफहमी है। ये अधूरा सच है। मैं और निशा इस दस बाई दस फुट के कमरे में रहते हैं। रात को जब कमरे में हल्की रोशनी होती है तो दीवारों का ये केसरिया रंग मुझे अच्छा लगता है। हमारे पास एक ढोलक है, एक बिस्तर और कोने में दुर्गा जी की ये मूर्तियां। निशा इनकी पूजा करती है। निशा कहती है कि जब हम अपने रिश्ते के बारे में अपने परिवारवालों को ही नहीं समझा पाये, तो लोगों को इस बारे में समझाने से क्या बदल जायेगा। इसीलिए घर के बारे में वो बाहर के लोगों से कम ही बात करती है। निशा मुझे किसी हिरोइन से कम नहीं लगती। बड़ी-बड़ी आंखें। साफ रंग। और माथे पर बड़ी बिंदी लगाने का उसे बहुत शौक है। हम दोनों की कहानी बारह साल पहले दोस्ती से शुरू हुई थी।

The story of a man marrying a eunuch
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

'बुरी संगत'
पहले निशा का नाम प्रवीण था। हम एक ही मोहल्ले में रहते थे। जब मैं प्रवीण से पहली बार मिला, तो वो दसवीं क्लास में था। मैंने छठी क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। मां-बाप और बड़े भाई ने काफी समझाया था कि मैं स्कूल जाऊं। पर उन दिनों हम खुद को 'हीरो' समझते थे। आज मैं भले ही उसे 'बुरी संगत' कहूँ, लेकिन जिन लोगों में मैं उठ-बैठ रहा था, उनका मुझ पर काफी असर था। उनमें से ही कुछ लोगों के साथ मिलकर मैंने शादी वाले घरों में जाकर 'घोड़ी', 'टप्पे', 'बन्ने' और कई दूसरे तरह के लोकगीत गाने का काम शुरू किया था। सोलह साल की उम्र में मैं अपने खर्चे खुद उठाने लायक हो गया था। उधर, प्रवीण बारहवीं क्लास में आ गया था।

The story of a man marrying a eunuch
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

'उसे बांधकर पीटा'
हम दोनों नाबालिग थे और लव-रिलेशन में थे। वो लड़की है या लड़का, इस बात से मुझे कभी फर्क महसूस नहीं हुआ। उसका खूबसूरत होना या लड़की जैसा दिखना, मेरे लिए मायने नहीं रखता था। बल्कि जब मैं और प्रवीण मिले थे, तब वो लड़कों की तरह ही पैंट-शर्ट पहनता था। किसी लड़की के साथ रिलेशन में होना कैसा होता है, ये भी मुझे इसलिए पता है क्योंकि प्रवीण से पहले मैं एक लड़की के साथ दो साल तक रिलेशन में था। हमारे शारीरिक संबंध भी थे, लेकिन वो मुझसे आठ साल बड़ी थी। बाद में उसकी शादी हो गई। पर मुझे लगता है कि मैं किसी महिला से रिलेशन होने के मुकाबले अब ज्यादा खुश हूं। लेकिन प्रवीण के साथ होने का एहसास मुझे हमेशा ही अच्छा लगा। घर में मैं पति हूं और वो पत्नी। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रवीण की फीलिंग शुरुआत से ही लड़कियों वाली थी। उसे मेकअप करने का बहुत शौक है। 12वीं क्लास में ही उसने अपने कान छिदवा लिये थे और बाल बढ़ाने शुरू कर दिये थे। यहाँ तक कोई समस्या नहीं थी। लेकिन जब प्रवीण के घरवालों को पता लगा कि उनका बेटा 'लड़का' नहीं है और वो मेरे साथ रिलेशन में है तो उन्होंने रस्सी से बांधकर उसकी पिटाई की। और ऐसा सिर्फ एक बार नहीं हुआ। उन्होंने प्रवीण को घर से निकाला तो नहीं, लेकिन उसे छत पर बने एक कमरे में रहने को कह दिया और वहां पानी और बिजली तक बंद कर दी।

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The story of a man marrying a eunuch
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

किन्नरों का ग्रुप
वो पढ़ाई कर सके इसके लिए तब मैंने एक बैटरी का इंतजाम किया था। मुझे लगता है कि उस वक्त जो तकलीफें थीं, उनसे हम साथ लड़े, जिस वजह से हमारा रिश्ता और मजबूत हुआ। मुझे खुशी है कि प्रवीण मुझसे ज्यादा पढ़ लिख गया। मेरी मां कहती थी कि पढ़ने-लिखने से दुनिया बदल जाती है। पर प्रवीण के लिए दुनिया नहीं बदली। 'किन्नरों को नौकरी नहीं देंगे', ऐसा कहकर कई लोगों ने प्रवीण को काम पर रखने से मना कर दिया। इसी वजह से प्रवीण ने किन्नरों के समूह में शामिल होने का फैसला किया था। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। मैं जानता था कि किन्नरों का ग्रुप जॉइन करने का मतलब होगा, शादियों और लोगों की खुशी के मौकों पर गाना गा-बजाकर पैसे मांगना। मुझे आज भी याद है वो दिन, जब मैंने पहली बार निशा (प्रवीण) को गली में तालियां पीटते देखा था। मुझे बहुत दुख हुआ था। लोगों ने, उसके घरवालों ने उसे वैसे ही स्वीकार किया होता, उसकी थोड़ी भी मदद की होती तो वो आज कुछ और कर रही होती। उसे मजबूरी में इस पेशे में न आना पड़ता। हालांकि मैं अब साउंड सिस्टम लगाने का ठेका लेने लगा हूं और हम दोनों मिलकर ठीकठाक कमा लेते हैं। घर चल जाता है।

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The story of a man marrying a eunuch
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

'हिजड़ों की शादी'
निशा के साथ जो हुआ, उसे लेकर शुरुआत में मुझे थोड़ा गुस्सा आता था। लेकिन उसके काम को लेकर शर्मिंदगी का अहसास मुझे कभी नहीं हुआ, क्योंकि वो खुश थी। हम खुश थे। किन्नर समूह की मुखिया ने ही प्रवीण का नाम बदलकर निशा रखा था। मैंने इस सबमें उसका साथ दिया पर उसके बड़े भाई और उसके पिता ने कई बार उसकी पिटाई की। निशा के घर का माहौल इतना खराब हो गया कि जब उसकी मां का देहांत हुआ तो परिवारवालों ने उससे मुंडन करवाने को कहा, लेकिन निशा ने साफ मना कर दिया। निशा की मां के गुजरने के कुछ दिन बाद हमने शादी कर ली। हमारी शादी को अब लगभग दस साल हो गए हैं। एक बार हमने सरकारी दफ्तर में जाकर छोटे बाबू से अपनी शादी रजिस्टर करवाने के बारे में पूछा था। वो बोले, "हिजड़ों की शादी रजिस्टर नहीं होती।" किसी ने बताया कि निशा सेक्स चेंज ऑपरेशन करा ले तो शादी रजिस्टर हो सकती है। लेकिन ये सब करने की जरूरत हमें महसूस नहीं हुई। तो हमारी शादी की कोई कागजी या कानूनी मान्यता नहीं है।

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