लोग अक्सर अपने घर के दरवाजे पर ऐसी डोर बेल लगवाते हैं, जिसकी आवाज मधुर होने के साथ घर में मौजूद लोगों को भी आसानी से सुनाई दे जाए।पर क्या पर जानते हैं आपकी डोर बेल आपके घर में क्लेश का कारण भी बन सकती है।जी हां सुनकर भले ही हैरानी हो लेकिन यह बात एकदम सच है। दरअसल डोर बेल लगाते समय वास्तुशास्त्र का बहुत ध्यान रखना चाहिए।वास्तुदोष होने पर ये आपके घर की शांति और खुशहाली तक को छीन सकता है।आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार डोर बेल से जुड़ी कई अहम बातें।
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door bell
- फोटो : file photo
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के बाहर डोर बेल जरूरी लगानी चाहिए। घर में डोर बेल नहीं होने की स्थिति में घर आए मेहमान घर के लोगों को आवाज देकर या फिर दरवाजा खटखटाकर बुलाते हैं। वास्तु की मानें तो कुंडी खटखटाने या आवाज देकर घर के लोगों को बुलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है।जिसकी वजह घर में रहने वाले लोगों के दिमाग पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है और वो काफी चिड़चिड़े हो जाते हैं।
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बहुत कम ही लोग इस बात को जानते हैं कि वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की डोर बेल जमीन से कम से कम पांच फीट की ऊंचाई पर लगी होनी चाहिए।अगर इस बात का दूसरा पहलू देखें तो ऐसा इसलिए भी है क्योंकि ऐसा करने से घर के लोग बच्चों की शरारतों और छेड़छाड़ से परेशान होने से बच जाते हैं।
वास्तुशास्त्र की मानें तो घर की नेम प्लेट हमेशा डोर बेल से ऊपर लगी होनी चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से परिवार के मुखिया का यश और कीर्ति हमेशा बढ़ी हुई रहती है। इसके अलावा घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बना रहता है।जिससे घर में खुशियों के आगमन के साथ परिवार के लोग भी आपस में मिलजुलकर रहते हैं।
अगर नेमप्लेट और डोर बेल में दोष है तो बिना बात घर के लोगों में कड़वाहट बनी रहती है। ऐसी स्थिति में घर में जो भी गेस्ट आएंगे, उनका घर से नाराज होकर जाने की आशंका बढ़ी रहती है।