प्यार करने वालों को वेलेंटाइन वीक का बेसब्री से इंतजार रहता है। रोज डे के साथ 7 फरवरी को इसकी शुरुआत होती है और 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे मनाया जाता है। पश्चिमी देशों में तो इस दिन की रौनक अपने शवाब पर होती है, वहीं भारत और अन्य पूर्वी देशों में इस दिन को मनाने का अपना-अपना अंदाज होता है। प्यार के इजहार का यह खास सप्ताह पूरे जोरशोर से मनाया जाता है। क्या आप जानते हैं, वेलेंटाइन डे क्यों मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कैसे हुई थी?
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संत वेलेंटाइन
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ऐसा माना जाता है कि वेलेंटाइन-डे मूल रूप से संत वेलेंटाइन के नाम पर रखा गया है। परंतु संत वेलेंटाइन के विषय में ऐतिहासिक तौर पर विभिन्न मत हैं और कुछ भी सटीक जानकारी नहीं है। 1969 में कैथोलिक चर्च ने कुल 11 संत वेलेंटाइन के होने की पुष्टि की और 14 फरवरी को उनके सम्मान में पर्व मनाने की घोषणा की। इनमें सबसे महत्वपूर्ण वेलेंटाइन रोम के संत वेलेंटाइन माने जाते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कहा जाता है कि संत वेलेंटाइन ने अपनी मृत्यु के समय जेलर की नेत्रहीन बेटी जैकोबस को नेत्रदान किया व जेकोबस को एक पत्र लिखा, जिसमें अंत में उन्होंने लिखा था 'तुम्हारा वेलेंटाइन'। यह दिन था 14 फरवरी, जिसे बाद में इस संत के नाम से मनाया जाने लगा और वेलेंटाइन-डे के बहाने पूरे विश्व में निःस्वार्थ प्रेम का संदेश फैलाया जाता है।
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Relationship
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साल 1260 में संकलित की गई 'ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन' नामक पुस्तक में संत वेलेंटाइन का वर्णन मिलता है। जब तीसरी सदी थी तो रोम में क्लॉडियस नाम के राजा का राज हुआ करता था। क्लॉडियस मानते थे की विवाह (शादी) करने से पुरुषों का दिमाग और शक्ति दोनों ही खत्म हो जाती है।
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इसी सोच के साथ क्लॉडियस ने पूरे राज्य में यह आदेश जारी कर दिया की उसके जितने भी सैनिक और अधिकारी है वे विवाह नही करेंगे, पर संत वेलेंटाइन ने क्लॉडियस के इस क्रूर आदेश का विरोध किया। साथ ही पूरे साम्राज्य में लोगों को शादी करने के लिए प्रेरित किया।