किशोरावस्था, जीवन का वह समय होता है, जब बहुत जरूरी है कि बच्चों को सही परवरिश मिले। यदि एक बार सही परवरिश मिल जाए तो आगे का जीवन बेहतर हो जाता है। किशोरावस्था में बच्चों का स्वभाव बहुत अलग-अलग तरह से परिवर्तित होता है। हर माता-पिता की परवरिश के तरीका अलग होता है। कुछ इस दौरान बच्चों के प्रति थोड़ा सख्त रवैया भी रखते हैं और कुछ नर्म स्वभाव से भी पेश आते हैं लेकिन अच्छी परवरिश के लिए बहुत जरूरी है कि इनका मिश्रण हो। यदि आप भी चाहते हैं कि आप अपने बच्चों की सही परवरिश दे सकें तो इन तरीकों को जरूर आजमाएं।
किशोरावस्था में इन तरीकों से करें बच्चों की सही परवरिश
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घर का माहौल अच्छा रखें
अगर आप घर का माहौल खुशनुमा रखेंगे तो बच्चों की परवरिश सही ढंग से होगी। अगर आप घर का माहौल तनावभरा रखेंगे तो बच्चे भी डरे, सहमे और चिंतित रहेंगे। इसलिए बहुत जरूरी है कि आप घर के माहौल को बहुत प्यारभरा रखें ताकि बच्चे खुश रहें। बच्चे खुश रहेंगे तो वे आपसे जुड़े हुए रहेंगे, उन्हें घर पर रहना भी अच्छा लगेगा। वे बाहर भी लोगों से खुशियां ही बांटेंगे। वे खुश रहना ही सीखेंगे।
दोस्ती कर लें
किशोरावस्था में बहुत जरूरी है कि आप बच्चों से दोस्ती कर लें। यदि आप उनपर अपनी बात थोपेंगे या बहुत ज्यादा सख्त रवैया रखेंगे तो यह ठीक नहीं होगा। अगर आप उनसे दोस्त सा रिश्ता रखेंगे तो वो अपने मन की बातें साझा कर सकेंगे। आप उनकी समस्याओं का हल खोज सकेंगे। यदि दोस्ती का रिश्ता नहीं रहेगा तो आपके ही लिए बच्चों को समझना मुश्किल हो जाएगा।
उन्हें जिम्मेदार बनाएं
उम्र के साथ आप उन्हें जिम्मेदार बनाने की कोशिश करें। उन्हें छोटे- छोटे काम करने को कहें। उन पर विश्वास जताएं। जब आप उन्हें जिम्मेदार बनाएंगे तो उनकी मानसिक क्षमता का विकास होगा। उन्हें रूपये दें और उन्हें बताएं कि इतने ही रूपये में उन्हें सामान लाना होगा। ऐसा करने से वे सीखेंगे। जरूरत पड़ने पर वे खुद से यह सब काम करने लगेंगे।
यदि किशोरावस्था में आप बच्चों पर अधिकार जताएंगे तो उन्हें लगेगा कि वे दबाव में रह रहे हैं। वे आपके बीच घुटन महसूस करने लगेंगे। उनका दिमाग स्वतंत्र नहीं रह सकेगा। दिन-ब-दिन वे बागी होने लगेंगे। उनके मन में नकारात्मक भाव आने लगेंगे। वे अकेले रहना ज्यादा पसंद करेंगे। वे समय के साथ आपसे दूर हो जाएंगे। इसलिए उनपर अधिकार जताने की बजाय उन्हें खुद के साथ शामिल करें।