फ़ीमेल ऑर्गेज्म यानी शारीरिक संबंध बनाने के दौरान एक स्त्री के चरम सुख की बात। आपने इसके बारे में पत्र-पत्रिकाओं में ही ज़्यादा सुना-पढ़ा होगा, वैज्ञानिकों के हवाले से इस पर बहुत कम बात हुई है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने ऑर्गेज़्म, इसकी जटिलता और इसकी दिक्कतों पर पहले की तुलना में ज़्यादा शोध करना शुरू किया है। वैज्ञानिक भी मान रहे हैं कि महिलाओं के चरम सुख को लेकर जो दिक्क्तें हैं, उनमें सबसे बड़ी ये है कि पुरुषों की देह को लेकर जितने अध्ययन हुए, उतने महिला देह पर नहीं हुए हैं। केलिस्टा विल्सन सैन फ्रांसिस्को की फैशन स्टाइलिस्ट हैं।
महिलाओं की यौन समस्या को पुरुषों के मुकाबले कम तरजीह दी जाती है
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विल्सन कहती हैं, "मुझे लगता है जैसे मेरी टांगों के बीच कुछ जल रहा है। कुछ खुजली जैसी मची रहती है। और फिर सेक्स संबंध बनाना हो या टेम्पून लगाने की बात हो, उस वक्त ऐसा लगता है मानो कोई भीतर खंजर डाल रहा हो। बहुत दर्द होता है।" टेम्पून एक किस्म का सेनेटरी पैड होता है जिसे पीरियड के वक्त इस्तेमाल किया जाता है। केल्सिटा को ये परेशानी पहली बार तब हुई जब वो 12 साल की थीं। उन्होंने टेम्पून लगाने की कोशिश की तो उनकी योनि में भयानक दर्द हुआ। वो इस दिक्कत को झेलती रहीं और आखिरकार तब डॉक्टर के पास पहुँचीं जब वो 20 साल की हो गईं थीं।
केलिस्टा बताती हैं, "डॉक्टर भी परेशान हो गई. उन्होंने कहा कि तुम तो बिलकुल सामान्य दिखती हो। मुझे तो लगता है कि ये सब तुम्हारे दिमाग का फितूर है। तुम्हें किसी थेरेपिस्ट से मिलना चाहिए।" फिर उनकी परेशानी का हल निकलने में 10 साल और निकल गए। इस पूरे वक्त के दौरान यौन अंगों से जुड़ी दिक्कतों का उनके रोजमर्रा के जीवन पर काफ़ी असर पड़ा. उन्हें न केवल अवसाद से जूझना पड़ा बल्कि उनके संबंध भी टूटे। कई डॉक्टरों से मिलने के बाद आख़िर एक दिन वॉशिंगटन डीसी में उनकी मुलाक़ात डॉक्टर एंड्र्यू गोल्डस्टेन से हुई। वे यहीं वुल्वोवेजाइनल डिसऑर्डर सेंटर में निदेशक के पद पर थे। गोल्डस्टेन ने बताया कि डॉक्टर के मुताबिक़ उनकी योनि के मुख पर मौजूद नसें काफ़ी संवेदनशील हैं। सामान्य से 30 गुना अधिक। यही कारण है कि जब भी उनकी योनि किसी वजह से छुई जाती है, वहां जलन होने लगती है।
डॉक्टर ने उनके योनि के मुख की त्वचा गोलाकार हिस्से में हटा दी, जिससे उनकी ये परेशानी दूर हो गई। पहली बार केलिस्टा विल्सन ने बिना किसी तकलीफ के सेक्स संबंध बनाया। केलिस्टा की इस परेशानी को कनजेनिटल न्यूरोप्रोलिफरेटिव वेस्टिबुलोनिया कहा जाता हैं। ये आम समस्या नहीं है। न्यूयॉर्क की स्त्री रोगों की विशेषज्ञ डॉक्टर डेबरा कोअडी ने जब इस विषय में छानबीन शुरू की तो पाया कि पुरुष जननांगों से जुड़ी देखने, सुनने, समझने की चीजें बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं। लेकिन स्त्री जननांगों पर घनघोर चुप्पी है। उन्होंने खुद पहल करते हुए कई विशेषज्ञ सर्जनों के साथ मिलकर एक टीम बनाई, और जांच-परख में जुट गईं। कई दिलचस्प बातें सामने आईं। उन्होंने पाया कि पेल्विक नर्वस सिस्टम यानी पेड़ू तंत्रिका तंत्र से जुड़ी परेशानी हर महिला में एकदम अलग-अलग होती है।
कोअडी बताती हैं, "योनि और भीतरी जननांगों से जुड़े तंत्रिका तंत्र यानी प्यूडेनल नर्व सिस्टम की बात करें तो किसी भी दो महिला में ये एक जैसा नहीं होता। प्यूडेनल नसें महिलाओं को यौन चरम सुख देने में सबसे अहम होती हैं। यही वो सिस्टम है जो जननांगों को स्पर्श करने, दबाने और यौन क्रिया करने से जुड़े आवेगों को दिमाग़ तक पहुंचाता है। कोअडी ने शोध में पाया कि महिला जननांगों के पांच अलग-अलग हिस्से होते हैं। इस हिस्से में जो नसें पाई जाती हैं वो अलग-अलग महिलाओं में अलग-अलग तरीके से संवेदनशील होती हैं। ये पांच हिस्से हैं- क्लिटॉरिस (भगशिश्न), योनि मुख, सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा), गुदा और पेरिनम (योनिमुख के बीच का हिस्सा)। कोअडी बताती हैं, "क्यों किसी महिला का क्लिटॉरिस ज्यादा संवेदनशील होता है, किसी को बस यौन मुख के पास अधिक आवेग महसूस होता है, तो किसी महिला को किसी दूसरे हिस्से में ज्यादा फीलिंग आती है? इन सारे सवालों के जवाब यहीं मौजूद हैं।"