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बिना शादी के मां बनने वाली एक लड़की कहानी

Mon, 11 Nov 2019 03:38 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Mon, 11 Nov 2019 03:38 PM IST
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Story of a girl who becomes a mother without marriage
अपनी नवजात बेटी से मिलना मेरे लिए किसी सेलिब्रिटी से मिलने जैसा था। मैं लंबे समय उससे मिलने के बारे में सोच रही थी। मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं उसे पहले से ही जानती हूं। मैंने उसकी आंखों में भी नहीं देखा और मुझे उससे प्यार हो गया। उस वक़्त मैं इतना ही जानती थी कि मैं उसकी सुरक्षा के लिए हर संभव कोशिश करूंगी। भले ही तब मुझे ये नहीं पता था कि मैं यही चीज़ें अपने ख़ुद के लिए कैसे करूंगी।2018 की सर्दियों में मुझे गर्भवती होने के बारे में पता चला। मैं और मेरा ब्वॉयफ्रेंड हैरान थे और ये हमारे लिए एक झटके से कम नहीं था। हम दोनों एक साल से भी कम समय से संबंध में थे। हम साथ भी नहीं रहते थे और मैं अपने गुज़ारे के लिए बहुत मुश्किल से कमा पाती थी। इन सब के साथ एक और समस्या ये थी कि मैं पिछले दो सालों से मानसिक बीमारी से जूझ रही थी।

गर्भधारण के बारे में सुनकर जब मैं और मेरा ब्वॉयफ्रेंड थोड़ा संभले तो हमने बच्चे को जन्म देने का फ़ैसला किया। हालांकि, उस वक़्त हमने मां-बाप बनने के बारे में कुछ नहीं सोचा था लेकिन हम दोनों को बच्चों से प्यार था और हम एक परिवार बनाना चाहते थे। इसलिए, थोड़े डर, उत्सुकता और असहजता के साथ मैंने मां बनने की यात्रा शुरू की।


 
Story of a girl who becomes a mother without marriage
- फोटो : Pixabay
बॉर्डर्लिन पर्सेनेलिटी डिसऑर्डर
एक साल पहले 26 साल की उम्र में मुझे अपनी बीमारी बॉर्डर्लिन पर्सेनेलिटी डिसऑर्डर (बीपीडी) के बारे में पता चला था। इसे इमोशनल अनस्टेबल पर्सनेलिटी डिसऑर्डर (भावनात्मक रूप से अस्थिर व्यक्तित्व विकार) भी कहते हैं। बीपीडी अक्सर नकारात्मक सोच, आवेगी व्यवहार और दूसरों के साथ भावुक लेकिन अस्थिर संबंधों से जुड़ा होता है। साल 2014 के एक सर्वेक्षण के मुताबिक ब्रिटेन के दो प्रतिशत लोग इससे प्रभावित हैं।

बाहर से मैं बहुत शांत लगती हूं लेकिन अंदर से मेरे दिमाग़ के कई हिस्सों में भावनात्मक लड़ाई चल रही होती है। मेरी ज़िंदगी में जो कुछ भी अच्छा या सकारात्मक होता है जैसे एक सही लड़के से मिलना या अपनी मनचाही नौकरी पाना, तो मुझे नकारात्मक ख़याल आने लगते हैं। जैसे कि मैं इस सबके लायक नहीं हूं या ये सब कुछ इतना भी अच्छा नहीं है, अपने आपको के बेवकूफ़ मत बनाओ।जिस साल मुझे बीपीडी का पता चला उसी साल मेरे साथ यौन शोषण भी हुआ। मैं 15 साल की उम्र से ख़ुद को नुक़सान पहुंचाती रही हूं और यौन शोषण के बाद मैं ख़ुद को काटने और जलाने भी लगी। मैंने उन बुरी यादों को भुलाने के लिए कैजुअल सेक्स, बहुत ज़्यादा शराब पीना शुरू कर दिया और किसी पेशेवर की मदद लेने को नकारती रही।


 
Story of a girl who becomes a mother without marriage
- फोटो : social media
उतार-चढ़ाव से भरे अनुभव

मेरा शरीर मेरी शर्म को बाहर निकालने के लिए एक कैनवास बन गया, इस कारण ये विचार एक झटके की तरह था कि यही शरीर एक नई जान को जन्म देने जा रहा है। जब मैं पहली बार अपने प्रेमी से मिली, मैं पुरुषों से नफ़रत को लेकर मज़ाक किया करती थी। इन चीज़ों को मज़ाक का रूप देकर मैंने ख़ुद को संभालने की कोशिश करती थी।उसने आखिरकार मुझसे पूछ लिया कि मेरी इस कड़वाहट का कारण क्या है। ये सुनते ही मेरे अंदर जैसे कुछ टूट गया और मैंने उसे अपने साथ हुई उस घटना के बारे में बताया। मुझे पता था कि मैं उस पर भरोसा कर सकती हूं और ये एक ग़ज़ब का अहसास था। जैसे-जै़से मेरी गर्भावस्था आगे बढ़ी, मुझे असल उतार-चढ़ाव का अनुभव हुआ। कई बार में बहुत ख़ुश रही। मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने बहुत प्यार दिया और मेरा ध्यान रखा। उसने मेरे बदलते हुए मूड के साथ तालमेल बैठाया। लेकिन, बुरे दिनों में जैसे सब कुछ बिगड़ गया।


 
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Story of a girl who becomes a mother without marriage

इसकी वजह थी एक सहकर्मी की कही बात। उसने बस यही कहा था कि मेरा बेबी बम्प (गर्भवास्था में पेट का उभार) छोटा है और इसे सुनकर मैं बाथरूम मे जाकर रोने लगी। मैं सोचने लगी कि क्या मेरा शरीर मेरे बच्चे को सुरक्षित नहीं रख सकता? क्या ये एक बुरी मां होने की निशानी है? ये बेवकूफ़ाना लग सकता है लेकिन मेरा दिमाग़ सामान्य तरीक़े से नहीं सोचता। मैं इन्हीं बातों में फंस गई और लोगों को बताने लगी कि मेरे साथ क्या हो रहा है। मुझे इस पर शर्म आने लगी कि मैं वैसी मां नहीं बनी जैसा मैंने सोचा था, जोशीली, उत्साहित और ख़ुश। लगभग छह महीनों के बाद मेरी हालत बद से बदतर हो गई। मिडवाइफ के साथ होने पर या तो मैं घुटन महसूस करती या अपनी सारी चिंताओं को ख़त्म कर देती।


 
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Story of a girl who becomes a mother without marriage
मानसिक स्वास्थ्य से जूझती महिलाएं

मैं गर्भधारण के तीन महीने बाद ही एक काउंसलर को दिखाना शुरू कर दिया था। मैंने फ़ैसला किया क अब मेरा ब्वॉयफ्रेंड अपनी बात रखेगा कि कैसे मेरी बीमारी उसे प्रभावित करती है, वो मुझे लेकर कितनी चिंता करता है और मुझे उसकी कितना ज़्यादा ज़रूरत है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ मेरी जैसी मांएं ही गर्भधारण और प्रसव के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का सामना करती हैं। बीबीसी लाइव 5 के 2017 के एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ एक तिहाई से ज़्यादा नई मांएं मातृत्व को लेकर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को झेलती हैं।


 
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