एक ऐसी लड़की की कहानी जो पत्नी भी है और पति भी। सोफ़ी टैनर अपने आप में अजूबा है, लेकिन उसने ऐसा किया। उस लड़की के शब्दों में ही पढ़िए उस विचित्र शादी का अनुभव। दो साल पहले मैंने ख़ुद से ही शादी कर ली थी। वो शादी का दिन मेरे जीवन का सबसे बेहतरीन दिन था। मैं विंटेज गाउन में थी और डबडबाई आंखों से मेरे पिता मुझे विदा कर रहे थे।
शादी की उस रात शारीरिक संबंध नहीं बने, लेकिन बहुत कुछ अलग था..!
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मेरे दोस्त इस शादी में ख़ुशी से नाच रहे थे। पुरुषों और महिलाओं के बीच ख़ुद से शादी करने का अभियान दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया भर में ख़ुद से शादी की चाहत रखने वाले लोगों के लिए इससे जुड़े सलाहकार और सेल्फ़-वेडिंग प्लानार तेजी से उभर रहे हैं। ब्राइटन (इंग्लैंड) में जिस दिन मैंने शादी की, चमकीली धूप खिली हुई थी। यहां मैं अपने लैब्राडोर कुत्ते एला के साथ रहती हूं। ब्रिटेन में मेरी यह शादी वैध नहीं है, पर मेरे लिए यह बहुत ख़ास समारोह था जिसमें ख़ुद से सहानुभूति के प्रति प्रतिबद्धता दिखी। मैं 38 साल की हूं और मेरे साथ दुखद रिलेशनशिप का बाक़ी हिस्सा था।
मेरे आख़िरी पार्टनर से मैं बेइंतेहा मोहब्बत करती थी और उसके प्यार में बह गई थी, लेकिन उसने जल्दी ही वो रिश्ता तोड़ दिया। इस मोहब्बत की उम्र 18 महीने रही थी। उसने मेरे दोस्त के साथ मुझे धोखा दिया। यह धोखा मेरे लिए सामान्य नहीं था। इससे भयानक दर्द मिला। गहरे सदमे में थी और आंसू थम नहीं रहे थे। तब मैं ख़ुद से सवाल कर रही थी।
इससे पहले भी मैं धोखा खा चुकी थी और मुझे इसका अंदेशा था। मुझे तत्काल ही लगने लगा कि एक बार फिर से ग़लत इंसान से मोहब्बत कर बैठी हूं। मैं कभी लड़कियों की तरह उस ख़ास दिन के लिए कोई सपना नहीं देखा था। हालांकि ब्रेकअप के बाद मैंने अपने भीतर ख़ुद को तलाशना शुरू किया।
मुझे लगा कि ख़ुद में प्यार की तलाश से ज़्यादा रोमैंटिक और क्या हो सकता है? किसी दूसरे अच्छे-बुरे व्यक्ति के साथ की मुझे ज़रूरत नहीं है और न ही मैं लगातार किसी की तलाश में रह सकती हूं। शायद मैं जिसकी तलाश में थी वो मैं ही हूं। शादी समारोह का आयोजन काफ़ी आसान था। यह आयोजन केवल मेरी ख़ुशी के लिए था। मैंने लंदन से विंटेज ड्रेस ख़रीदी थी। शादी के लिए मैंने ब्राइटन बीच को बुक किया था। मैंने कई तरह की ड्रिंक की व्यवस्था की थी। इसके साथ ही शादी के पारंपरिक रिवाज़ों को भी अपनाया ताकि ख़ुद के प्रति संकल्पित दिखूं। मैंने अपनी निराशाओं से जूझने की क़सम खाई। मैंने अपनी नाकामी क़बूली। मैंने अच्छे और बुरे दिनों में अपना सबसे अच्छा दोस्त बनने की क़सम खाई। इसके साथ ही मैंने सफलता की सूरत में जश्न मनाने का भी संकल्प लिया।