रेनू, एक प्राइवेट कंपनी में काम करती हैं। उनकी तीन साल की बेटी जिया जरा शर्मिली है। रेनू कहती हैं- अगर कोई मुझे अपनी बेटी के लिए एक गुण चुनने के लिए कहे तो मैं 'आत्मविश्वास' चुनूंगी। बिना आत्मविश्वास के सबकुछ अधूरा है। लड़कियों में आत्मविश्वास होना बेहद जरूरी है। चाहे स्कूल हो या फिर नौकरी, 21वीं सदी में बिना आत्मविश्वास के नहीं जिया जा सकता है। ये ही वजह है कि जब कोई मेरी बेटी से पांच शब्दों में खुद का वर्णन करने के लिए कहता है तो- वो आत्मविश्वास को सबसे ऊपर रखती है। उसके भीतर आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए कई बार हम उसे खतरे में भी डालने से परहेज नहीं करते। हमने उसके शर्मिले स्वभाव में ही उसके भीतर आत्मविश्वास को मजबूत किया है।
वो तरीके जिनसे अपनी बेटी के आत्मविश्वास को बढ़ा सकते हैं
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: ललित फुलारा
Updated Wed, 28 Aug 2019 06:52 PM IST
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