#शादी, फैमिली और बातें: मुझे छोड़कर सारे मेरा पति ढूंढ रहे थे!
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सिंगल हो? नोएडा में फ्लैट लेकर अकेले रहती हो? शादी क्यों नहीं की अभी तक? कोई पसंद नहीं आया अभी तक या कोई बॉयफ्रेंड है? जिसे देखो वो इन्हीं सवालों की लाइन लगा देता है। इतना ही नहीं इन सवालों के बाद मुझे बहुत सारी सलाह और नसीहतें भी मिलती हैं।
दरअसल, लड़कियां 25 की उम्र पार करती नहीं हैं कि रिश्तेदारों से लेकर पड़ोसियों को शादी की टेंशन सताने लगती है। हमारे समाज में लड़की की शादी की टेंशन लड़की को छोड़कर बाकी सबको होती है।
स्कूल के दिनों में मैथ्स की क्लास में मैं अव्वल हुआ करती थी। मिनटों में मुश्किल से मुश्किल सवाल भी सॉल्व कर लेती थी, लेकिन शादी के इन सवालों का मेरे पास कोई हल नहीं है। सब ये तो पूछते हैं कि शादी क्यों नहीं कर रही हो किसी ने आज तक ये पूछने की जहमत नहीं की कि क्या मैं शादी करना चाहती हूं भी या नहीं? कोई नहीं जानना चाहता कि जिंदगी को लेकर मेरे क्या सपने हैं? मैं खुद के लिए क्या चाहती हूं। कोई मम्मी पापा के नाम पर इमोश्नल ब्लैकमेल करता है, तो कोई समाज के नियम बताने लगता है।
घर पर इन सवालों का सामना करते करते थक जाती हूं। मम्मी-पापा और दादी से मिलने का बहुत दिल करता है, लेकिन इन सवालों से बचने की वजह से कई बार घर ही नहीं जाती हूं। घर से वापस जब भी नोएडा आती हूं तो लगता है कि चलो अब कुछ दिन यहां सुकून से रह पाऊंगी। कम से कम यहां तो ये सवाल पीछा नहीं करेंगे, लेकिन टेक्नोलॉजी के इस जमाने में ऐसा भी न हो पाया। फोन कॉल से लेकर वॉटसअप, फेसबुक जिसे जहां मौका मिलता है वो वहीं पर इन सवालों की बौछार करता रहता है। कई बार तो कुछ लोगों को गुस्से में तीखा जवाब भी दे बैठती हूं।
दफ्तर से जिस दिन फ्लैट पहुंचने में देरी हो जाती है तो सामने वाली आंटी ऊपर से नीचे तक ऐसे घूरती हैं जैसे मैं ऑफिस से नहीं कहीं डेट से आ रही हूं। आए दिन जब लिफ्ट में टकराती हैं तो उनका एक ही सवाल होता है कि बेटा घरवाले लड़का नहीं देख रहे क्या? घर से दूर यहां अकेली रहती हो उन्हें फिक्र होती होगी। अब जल्दी शादी करो और पति के साथ यहीं रहना। इन आंटी की नजर घर पर आने-जाने से लेकर आपके खाने-कपड़ों सब पर होती है। अगर गलती से आपका कोई लड़का दोस्त घर आ जाए तो वो आपको इतने गंदे से देखती हैं कि मानो आपने कितना बड़ा गुनाह किया हो।
मेरी मम्मी मुझे शादी का कह कह कर थक गई हैं। वह कहती हैं कि आजकल के बच्चों को कुछ भी कहना बेकार है, क्योंकि तुम वही करोगे जो तुम्हें अच्छा लगता है। मां की चिंता मैं समझती हूं, लेकिन मैं खुद को अभी शादी के लिए तैयार नहीं मानती हूं।
मैं पिछले तीन साल से घर से दूर रहकर नौकरी कर रही हूं। मेरे लिए क्या ठीक है और क्या गलत ये अच्छे से जानती हूं। टिपिकल शादी में मुझे यकीन नहीं। समाज में स्थापित नियमों को मैं नहीं मानती। लड़के वालों के सामने चाय की ट्रे ले जाकर सिर झुकाकर बैठ जाना मेरे बस की बात नहीं। मुझे कोई ऐसा मिले जिसे मैं समझ पाऊं और जो मुझे समझ पाए तो शादी कर लूंगी। फिलहाल तो कोई मिला नहीं...!