मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट जैसे गैजेट्स आजकल हर घर में आम हैं। अब कोरोना महामारी के बाद तो इनकी संख्या और उपयोग दोनों ही काफी बढ़ गए हैं। वर्क फ्रॉम होम से ऑनलाइन स्कूल तक सबकुछ इन गैजेट्स में समा गया है। इसके अलावा मनोरंजन के लिए भी इस स्क्रीन पर ढेर सारे विकल्प मौजूद हैं। जाहिर है कि इससे लोगों का काफी समय स्क्रीन पर आंखें गड़ाए गुजर रहा है। मुश्किल यह है कि इससे लोगों में आपसी संवाद कम से कम हो रहा है। एक ही घर में बड़े-बच्चे सभी अलग-अलग फोन या अन्य गैजेट्स पर व्यस्त रहते हैं। इतना ही नहीं, काम के अलावा वेब सीरीज देखने से लेकर रेसिपी देखने और गेम्स खेलने तक लोग इन गैजेट्स का इस्तेमाल करते हैं। सुबह नींद खुलने से देर रात सोने तक इस मैजिक स्क्रीन का जादू लोगों को अपनी पकड़ से आजाद नहीं होने देता। वर्चुअल वर्ल्ड की इस व्यस्तता ने आपसी रिश्तों पर बहुत बुरा असर डाला है। विशेषकर पति-पत्नी के रिश्ते पर। अभी जबकि यह कठिन दौर जारी है। पारिवारिक सम्बल और सहयोग की जरूरत बढ़ गई है, आपसी बातचीत जब और भी जरूरी है। ऐसे में वर्चुअल दुनिया इन रिश्तों के बीच विलेन की तरह आकर जम गई है।
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समिधा की मुश्किलें कोरोना आने के बाद से और बढ़ गई हैं। पहले तो सुबह ऑफिस जाने से पहले और ऑफिस से आने के बाद चाय और डिनर घर के सब लोग साथ में किया करते थे। जब से कोरोना के कारण उसके पति को वर्क फ्रॉम होम और 13 वर्षीय बेटी को ऑनलाइन क्लासेस का ऑप्शन मिला है, ऐसा लगता है जैसे वो दोनों घर से गायब ही हो गए हैं। खाने की टेबल पर होने वाली दिनभर की बातचीत, हंसी-ठट्टा और मस्ती सब जैसे धुआं हो गई हैं। पति दिनभर लैपटॉप पर काम करते हैं और रात को या तो प्रेजेंटेशन तैयार करते हैं या मूवी देखते हैं। उधर बेटी भी दिन में एक लंबा हिस्सा क्लास में बिताती है और बाकी समय में दोस्तों से चैटिंग, कॉल्स या वीडियोज देखने में बिता देती है। ऊपर से वे दोनों अपना खाना भी अपने रूम में ले जाकर खा लेते हैं।
बढ़ता स्क्रीन टाइम, बढ़ती मुसीबतें
तेजी से दौड़ रहे समय में कोरोना के आने के बाद एकदम से लगाम लगी थी। लेकिन इंसान हर मुश्किल का हल निकालने की जद्दोजहद में रहता है। कुछ ही समय में इंटरनेट और वर्चुअल दुनिया ने सारी दुनिया को एकसूत्र में बांध दिया। दिक्कत यह बढ़ी कि लोग इस वर्चुअल दुनिया को ही असली दुनिया में बैठे हैं और असली दुनिया से दूर हो गए।
'लॉकडाउन की शुरुआत से ही मैं समझ गई थी कि अब सब अपने अपने फोन लेकर खो जाएंगे और फिर मैं पूरे घर में अकेली घूमती फिरूंगी।' कहती हैं मणिका। उनके अनुसार-'मैं जानती हूं कि काम तो करना ही होगा इसलिए उस समय तो गैजेट्स का यूज करने से किसी को नहीं रोक सकती। लेकिन बाकी समय के लिए कोशिश कर सकती हूं। इसलिए मैंने पहले हफ्ते में ही रूल्स बना दिए, जिन्हें पूरे घर को फॉलो करना ही होगा। जैसे कि काम के अलावा कितना एक्स्ट्रा टाइम फोन या लैपटॉप को देना है, खाना सबको एक जगह ही खाना है, संडे को फोन को कम से कम उपयोग में लाना है और सबसे बड़ी बात रात को उसी टाइम पर सोना है और सुबह उसी टाइम पर उठना है, जिस टाइम पर कोरोना आने के पहले उठा करते थे।'
आप भी बनाइए कुछ नियम
कोरोना महामारी को लगभग दो साल होने को आए हैं। कितने समय और यह स्थिति चलेगी, यह अभी कहना मुश्किल है। ऐसे में फोन या अन्य गैजेट्स बहुत महत्वपूर्ण साधन हैं जो अभी बहुत काम आ रहे हैं। तो इन्हें इस्तेमाल करना भी जरूरी है। इसलिए अगर कुछ नियम आप बना लेंगे तो इनके साइड इफेक्ट्स से भी बच सकेंगे और ये आपकी रिलेशनशिप में विलेन भी नहीं बन पाएंगे।
- सबसे पहले समय तय करें। इसमें आपके रात को सोने, सुबह जागने और पूरे दिन के समय का बंटवारा होना चाहिए। चूंकि ऑफिस और ऑनलाइन क्लासेस का समय तय होता ही है, इसलिए आपको दिक्कत नहीं आएगी।
- खाना परिवार के सभी लोग एक जगह और एक समय पर खाने का पूरा प्रयास करें। कभी किसी मीटिंग वगैरह की वजह से ऐसा न हो पाए तो अलग बात है।
- खाने के समय किसी के हाथ में कोई गैजेट नहीं हो और यही बात रात को सोते समय भी लागू करें।
- हफ्ते में एक दिन अगर आप बाहर जा सकते हैं तो ठीक वरना घर में ही सब मिलकर किसी एक्टिविटी में भाग लें। जैसे योगा, म्यूजिक, डांसिंग, छोटे फिजिकल गेम्स आदि।
- हफ्ते में एक दिन पति-पत्नी साथ बैठकर सामान्य बातचीत करें, जिसमें थोड़ी बहुत हेल्दी गॉसिप भी शामिल हो सकती है।
- बच्चों को किसी भी समय मोबाइल थमा देने की बजाय उन्हें अपने साथ किसी काम या एक्टिविटी में जोड़ें। कोशिश करें कि वे ऑनलाइन गेम्स या सोशल मीडिया में ही न उलझे रहें पूरा दिन।
- अगर बच्चे गेम खेल भी रहे हों तो कोशिश करें कि वे आपकी नजरों के सामने रहें, ताकि निर्धारित समय बाद आप उन्हें टोक सकें।
- व्हाट्सएप या फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स अक्सर बहुत समय ले लेते हैं। इनके लिए दिनभर का कोई एक समय तय करें, जब आधा-एक घंटा आप सिर्फ इन्हीं का उपयोग करें।