हर किशोर होते बच्चे के अभिभावक की यहीं परेशानी है कि उनका बच्चा न ही उनकी कोई बात सुनता है और न ही मानता है। ऐसे में आपको बिना उन बच्चों पर गुस्सा हुए ये सोचना होगा कि कैसे उन्हें समझाएं क्योंकि न आप उन्हें बच्चों की तरह ट्रीट कर सकते हैं और न हीं एक बड़े की तरह क्योंकि इन बच्चों का दिमाग उतना विकसित नहीं होता है। इसलिए आपको अपनी समझदारी से बीच का रास्ता निकालना होगा। ताकि वो आपकी बात को सुनें और समझें।
अगर आपका बच्चा नहीं सुनता आपकी बात तो ऐसे समझाएं
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एक अभिभावक होने के नाते ये जरूरी है कि आप अपने बड़े होते बच्चे के अंदर हो रहें बदलाव को समझें। इस समय बच्चों का मन बहुत अशांत रहता है और ये सब शरीर में हो रहें हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। इसी के साथ ही वो समाज में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे होते हैं और उन्हें इन उतार-चढाव के दौर में भावनात्मक संबल की जरूरत होती है।
किशोर उम्र के अभिभावक होने के नाते आपको अपने अंदर बहुत सारा धैर्य रखना होगा। आपको अपने बच्चों का दोस्त होकर बात करने की जरूरत नहीं है क्योंकि अगर आप दोस्त बन जाएंगी तो उन्हें सही और गलत का फर्क नहीं समझा पाएंगी। जरूरत है कि आप खुद से समझे और बच्चे के साथ ऐसी बांडिग बनाये कि वो अपने मन की सारी बात खुद ब खुद आपको बताए और आपसे सलाह ले।
बच्चों के अंदर अच्छे गुण डालने से पहले आपको अपने अंदर उन आदतों को उतारना होगा। क्योंकि जब आप उसके सामने अपना उदाहरण पेश करेंगी तो वह जल्दी बात समझेगा। साथ ही इस उम्र के बच्चों से घर-परिवार के बारे में बात करें। उनसे आर्थिक और पारिवारिक मुद्दों पर बात करें। साथ ही उनके करियर से जुड़ी बात करें और अपने करियर के बारे में बताएं। इस तरह की बातों को करने से उसके अंदर समझ और गंभीरता पैदा होगी और वो आपसे बातचीत के मामले में खुल जाएगा।