शादी के बाद रिश्ता शुरुआती सालों में तो बहुत सुंदर होता है लेकिन आगे चलकर यह डगमगाने लगता है, तब आवश्यकता होती है कि पति और पत्नी सामंजस्य बैठाकर इसे संभालें। इस वक्त यदि कोई एक भी यदि लापरवाही दिखा जाए तो समस्याएं खड़ी हो जाती है। अक्सर घरों में पुरुष महिलाओं पर इस कदर निर्भर हो जाते हैं कि वे समझ ही नहीं पाते हैं कि महिलाओं को कैसा महसूस हो रहा होगा। वहीं अंदर ही अंदर महिलाएं घुटती रहती हैं या फिर उनके बीच लड़ाइयां होना शुरु हो जाती है। अगली स्लाइड्स से जानिए स्वस्थ रिश्ते के लिए किन आदतों को पुरुषों को खुद से सुधार लेना चाहिए।
शादीशुदा पुरुषों की इन आदतों के कारण रिश्ते में आ जाती है खटास, जल्द ही कर लें सुधार
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बच्चों का ध्यान न रख पाना
छोटे बच्चों को माता और पिता दोनों की आवश्यकता होती है। महिलाएं बेहतर ढंग से बच्चों को संभालना जानती हैं। ऐसे में यदि पुरुष बच्चों पर ध्यान ही न दें या फिर जब उनकी बारी आए और वे लापरवाही करते नजर आए तो ऐसी स्थिति में महिलाएं पुरुषों से निराश होने लगती हैं। ऐसी स्थिति में कई बार गुस्सा पुरुषों के साथ ही बच्चों पर भी निकलता है। महिलाओं को महसूस होने लगता है कि बच्चे सिर्फ उन की ही जिम्मेदारी है।
घर के काम में हाथ न बंटाना
पुरुषों को घर के काम में हाथ बंटाने की आदत नहीं ही होती है क्योंकि कई सारे पुरुषों को बचपन से ही यह सिखाया नहीं जाता है। जब महिलाएं घर के काम को लेकर बहुत परेशान रहती हैं या फिर वे वर्किंग वीमेन हैं तो ऐसी स्थिति में वे पुरुषों से उम्मीद करती हैं कि वे थोड़ी- बहुत ही सहायता तो करे और जब ऐसा नहीं होता है तो घरों में किचकिच शुरु हो जाती है और रिश्ते में खटास आने लगती है।
बहुत अधिक पूछताछ करना
कई पुरुषों की आदत होती है कि वे महिलाओं से बहुत अधिक पूछताछ करते हैं। यदि वे थोड़ी देर के लिए भी घर से बाहर जाती हैं तो क्यों जा रही हैं या क्या आवश्यकता थी। किसी से बात की तो क्यों की, यह सब चीजें पुरुषों को भले ही अच्छी लगती हो लेकिन महिलाओं को ये सब बहुत परेशान करता है। वे पुरुष का सम्मान नहीं रख पाती हैं। उन्हें लगता है कि पुरुष उनपर विश्वास नहीं करते हैं।
जिम्मेदारी न लेना
दो लोग जब साथ रहते हैं तो जिम्मेदारियां अपने आप ही बंट जाती है। ऐसे में कई बार पुरुष जिम्मेदारियां नहीं उठाते हैं। उन्हें जब कोई काम बताया भी जाता है तो वे भूल जाते हैं या लापरवाही दिखा देते हैं। ऐसा करने पर महिलाएं परेशान होने लगती हैं क्योंकि वे भी मशीनें नहीं हैं और जब उन्हें महसूस होता है कि वे मशीन की तरह काम कर रही हैं तो वे अपने हमसफर से बहुत निराश होती हैं। वे कोशिश करती हैं कि पुरुष अपनी जिम्मेदारियों को समझें।