Marriage Tips For Son: शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का बंधन होती है। अक्सर देखा गया है कि नए रिश्तों में तालमेल बैठने में वक्त लगता है। ऐसे में जब माता पिता अपनी बेटी को विदा करते हैं तो उसे ससुराल में कैसे रहना है, एक अच्छी पत्नी और बहू कैसे बनना है, उसके लिए कुछ सबक देते हैं। हालांकि लड़कों को शादी के बाद एक बेहतर पति, दामाद कैसे बनना है, ये आमतौर पर परिवारों में कम ही सिखाया जाता है।
लड़की तो शादी के बाद ससुराल में एडजस्ट करने के लिए मानसिक और व्यवहारिक रूप से तैयार रहती है लेकिन लड़के इस स्थिति के लिए तैयार नहीं हो पाते। शादी से पहले माता-पिता का यह कर्तव्य होता है कि वे अपने बेटे को कुछ जरूरी बातें समझाएं, ताकि नई बहू को ससुराल में अपनापन महसूस हो। बेटे को शादी के पहले मानसिक रूप से बदलावों के लिए तैयार करें ताकि वह न केवल एक अच्छा पति बन सके, बल्कि एक जिम्मेदार बेटा और दामाद भी। एक समझदार बेटा ही दो परिवारों को जोड़े रख सकता है और बहू को ससुराल को सचमुच ‘घर’ जैसा महसूस करवा सकता है।
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पत्नी का बराबरी का दर्जा
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पत्नी का बराबरी का दर्जा
बेटे को सिखाएं कि शादी के बाद पत्नी उसकी ज़िम्मेदारी ही नहीं, उसकी जीवन संगिनी भी है। उसे घर के हर फैसले में शामिल करें। पत्नी की भावनाओं और राय का सम्मान करें। बहू कोई मेहमान नहीं बल्कि घर का स्थायी हिस्सा है।
पुराने और नए रिश्तों के बीच संतुलन
शादी के बाद बेटा अक्सर मां-पत्नी के बीच उलझ जाता है। उसे समझाएं कि रिश्तों में तुलना नहीं, सामंजस्य जरूरी है। बेटा अगर संतुलन बनाए रखे तो घर में न बहू को दिक्कत होगी और ना मां को शिकायत होगी। उसे पहले से ही ऐसी स्थिति के लिए तैयार करें कि हो सकता है कि कभी उसकी पत्नी और मां के बीच कोई मतभेद हो जाए तो उसे ऐसा क्या करना चाहिए ताकि दोनों के मतभेद को कम किया जा सके, न कि किसी एक का साथ दिया जाए।
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घरेलू कामों में सहयोग
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घरेलू कामों में सहयोग
बेटे को यह बात शादी से पहले ही समझा दें कि घरेलू काम सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है। कभी-कभी छोटी-छोटी चीज़ों में पत्नी का हाथ बंटाना, उसे भावनात्मक रूप से जोड़ता है और रिश्ते को मजबूत बनाता है। बेटी की तरह बेटे को भी घर के कामों में हाथ बंटाने को कहें ताकि वह पत्नी की मदद करने में झिझक महसूस न करें और घरेलू काम करने की समझ उसमें आ जाए।
बहू के परिवार को अपना बनाएं
बेटे को सिखाएं कि शादी के बाद जैसे बहू उन्हें अपना माता पिता समझकर इस परिवार में रहेगी। वैसे ही बेटा का फर्ज है कि वह अपनी पत्नी के माता-पिता का सम्मान भी उसी तरह करे। बहू के मायके व परिवार वालों को अपना समझे ताकि बहू को ससुराल के सदस्यों को अपनाने में दिक्कत न हो। दोनों परिवारों को एक करना सिर्फ बहू का नहीं, बल्कि बेटे का भी कर्तव्य है।