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Global Parenting Day: वो हाथ जिन्होंने चलना सिखाया, अब उनकी देखभाल हमारी जिम्मेदारी
Sun, 31 May 2026 11:19 AM IST
Shruti Gaur
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Sun, 31 May 2026 11:19 AM IST
सार
Global Parenting Day: 'ग्लोबल डे ऑफ पेरेंट्स' पर जानिए कैसे बदलते समय, न्यूक्लियर फैमिली और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच भी माता-पिता को प्यार, सम्मान और साथ दिया जा सकता है।
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उम्र बढ़ने के साथ माता-पिता को कैसे दें भावनात्मक सहारा?
- फोटो : AI
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Global Parenting Day: माता-पिता जीवन की सबसे मजबूत नींव होते हैं। बचपन में जिन हाथों ने हमें चलना सिखाया, गिरने पर संभाला और हर मुश्किल में साथ दिया, उम्र बढ़ने के साथ वही हाथ सहारे की उम्मीद करने लगते हैं। माता-पिता सिर्फ हमारे जन्मदाता नहीं, बल्कि हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत और आशीर्वाद होते हैं। इसलिए उनका सम्मान, देखभाल और साथ देना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारा फर्ज भी है।
उम्र बढ़ने के साथ माता-पिता को कैसे दें भावनात्मक सहारा?
- फोटो : Adobe stock
बदलते समय में बदलते रिश्ते
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में परिवार छोटे होते जा रहे हैं। काम, जिम्मेदारियों और करियर के दबाव के बीच माता-पिता के साथ समय बिताना मुश्किल होता जा रहा है। इसी कारण कई बुजुर्ग अकेलापन महसूस करने लगे हैं। अक्सर बच्चों के मन में माता-पिता के लिए प्यार और चिंता दोनों होती है, लेकिन रोजमर्रा की व्यस्तता, तनाव और जिम्मेदारियों के कारण चिड़चिड़ापन और दूरियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में रिश्तों को समझदारी और धैर्य से संभालना जरूरी हो जाता है।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में परिवार छोटे होते जा रहे हैं। काम, जिम्मेदारियों और करियर के दबाव के बीच माता-पिता के साथ समय बिताना मुश्किल होता जा रहा है। इसी कारण कई बुजुर्ग अकेलापन महसूस करने लगे हैं। अक्सर बच्चों के मन में माता-पिता के लिए प्यार और चिंता दोनों होती है, लेकिन रोजमर्रा की व्यस्तता, तनाव और जिम्मेदारियों के कारण चिड़चिड़ापन और दूरियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में रिश्तों को समझदारी और धैर्य से संभालना जरूरी हो जाता है।
उम्र बढ़ने के साथ माता-पिता को कैसे दें भावनात्मक सहारा?
- फोटो : अमर उजाला
दूर रहकर भी तकनीक का सहारा
अगर आप माता-पिता से दूर रहते हैं, तो आज की तकनीक दूरी कम करने में मदद कर सकती है। वीडियो कॉल, वॉइस असिस्टेंट और स्मार्ट डिवाइसेस के जरिए आप रोज उनसे जुड़े रह सकते हैं। आजकल ऐसे स्मार्ट सेंसर्स और हेल्थ डिवाइस भी आ चुके हैं, जो माता-पिता की गतिविधियों और स्वास्थ्य की जानकारी ऐप के जरिए बच्चों तक पहुंचाते हैं। इससे दूर रहकर भी उनकी चिंता काफी हद तक कम हो सकती है।
अगर आप माता-पिता से दूर रहते हैं, तो आज की तकनीक दूरी कम करने में मदद कर सकती है। वीडियो कॉल, वॉइस असिस्टेंट और स्मार्ट डिवाइसेस के जरिए आप रोज उनसे जुड़े रह सकते हैं। आजकल ऐसे स्मार्ट सेंसर्स और हेल्थ डिवाइस भी आ चुके हैं, जो माता-पिता की गतिविधियों और स्वास्थ्य की जानकारी ऐप के जरिए बच्चों तक पहुंचाते हैं। इससे दूर रहकर भी उनकी चिंता काफी हद तक कम हो सकती है।
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उम्र बढ़ने के साथ माता-पिता को कैसे दें भावनात्मक सहारा?
- फोटो : Adobe
'रिवर्स पेरेंटिंग' को जान लें
एक उम्र के बाद माता-पिता भी बच्चों की तरह देखभाल चाहते हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स इसे 'रिवर्स पेरेंटिंग' कहते हैं। इस समय उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत प्यार, धैर्य और भावनात्मक सहारे की होती है। बुढ़ापे में अकेलापन कई बार एंग्जायटी और डिप्रेशन का कारण बन सकता है। अगर बुजुर्गों को यह महसूस हो कि वे परिवार का जरूरी हिस्सा हैं, तो उनका आत्मविश्वास और खुशी दोनों बढ़ते हैं।
एक उम्र के बाद माता-पिता भी बच्चों की तरह देखभाल चाहते हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स इसे 'रिवर्स पेरेंटिंग' कहते हैं। इस समय उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत प्यार, धैर्य और भावनात्मक सहारे की होती है। बुढ़ापे में अकेलापन कई बार एंग्जायटी और डिप्रेशन का कारण बन सकता है। अगर बुजुर्गों को यह महसूस हो कि वे परिवार का जरूरी हिस्सा हैं, तो उनका आत्मविश्वास और खुशी दोनों बढ़ते हैं।
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उम्र बढ़ने के साथ माता-पिता को कैसे दें भावनात्मक सहारा?
- फोटो : Adobe stock
छोटे फैसलों में लें उनकी राय
घर के छोटे-छोटे फैसलों में माता-पिता की राय लेना उन्हें सम्मानित महसूस कराता है। चाहे घर के खाने का मेन्यू हो या बच्चों से जुड़ी कोई बात, उनकी भागीदारी उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है। इसके अलावा आजकल स्मार्टवॉच और हेल्थ ऐप्स की मदद से माता-पिता की सेहत पर नजर रखना काफी आसान हो गया है। ब्लड प्रेशर, शुगर और हार्ट रेट जैसी जानकारी तुरंत मिल जाती है, जिससे समय रहते सावधानी बरती जा सकती है।
घर के छोटे-छोटे फैसलों में माता-पिता की राय लेना उन्हें सम्मानित महसूस कराता है। चाहे घर के खाने का मेन्यू हो या बच्चों से जुड़ी कोई बात, उनकी भागीदारी उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है। इसके अलावा आजकल स्मार्टवॉच और हेल्थ ऐप्स की मदद से माता-पिता की सेहत पर नजर रखना काफी आसान हो गया है। ब्लड प्रेशर, शुगर और हार्ट रेट जैसी जानकारी तुरंत मिल जाती है, जिससे समय रहते सावधानी बरती जा सकती है।