अंशु सिंह
अच्छी और सच्ची सहेलियां वे होती हैं, जिन्हें कुछ भी समझाने की जरूरत नहीं पड़ती। वे अनकही बातों और भावनाओं को सहजता से भांप लेती हैं और जजमेंटल नहीं होती हैं। यह सच्ची दोस्ती हमें कभी बचपन में ही मिल जाती है, कभी स्कूल-कॉलेज में तो कभी ऑफिस में, लेकिन सच कहें तो बहन के रूप में मिली दोस्त का मुकाबला कोई नहीं कर सकता है। वह एक बेहतरीन तोहफा होती है, जो माता-पिता हमें देते हैं। यह कुदरत का रचा ऐसा खूबसूरत संबंध है, जो निश्छल, निस्वार्थ प्रेम एवं अटूट विश्वास पर आधारित है। बचपन से ही बहन के साथ कुछ साझा यादें होती हैं। बहन परछाई की भांति संग-संग रहती है। बढ़ती उम्र के साथ उसका व्यक्तित्व एवं आदतें भले ही जुदा हो जाएं, लेकिन एक-दूजे को दूसरों से कहीं बेहतर समझती है।
इसलिए जब बात दोस्ती की हो तो बहनों से अच्छी सहेलियां कोई और हो नहीं सकतीं। दिल्ली के एक सरकारी उपक्रम में अधिकारी सुपर्णा शर्मा कहती हैं, “अपनी बहन की सबसे अच्छी दोस्त होने का मतलब है कि आपको आलोचना की चिंता नहीं करनी पड़ती। न ही खुद को संभालने की जरूरत होती है। जब आप किसी लक्ष्य या सपने की ओर बढ़ती हैं तो वह परदे के पीछे आपके उतार-चढ़ाव को देख लेती है और आपकी उपलब्धियों का जश्न मनाती है, क्योंकि वह जानती है कि अमुक मुकाम तक पहुंचने के लिए आपने कितनी मेहनत की है।” सच्चे अर्थों में इसे ही दोस्ती कहा जाता है।
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खट्टे-मीठे अहसास
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खट्टे-मीठे अहसास
साथ-साथ बड़े होना। शरारत करना, लड़ना-झगड़ना, खेलना-कूदना, पढ़ना, घूमना, मौज-मस्ती करना। अमूमन हर भाई-बहन की जीवन यात्रा में ये सारे लम्हे एवं अनुभव शामिल होते हैं। भाई न भी हो तो दो बहनें भी आपस में इसी तरह के खट्टे-मीठे पलों के साथ सयानेपन की ओर बढ़ती हैं। बाकी संबंधों की तरह इनके रिश्ते का ताना-बाना भी एक अलग तरीके से बुनता है। या तो वे एक-दूसरे के करीब आती हैं, उनकी आपसी समझ, तालमेल वक्त के साथ बढ़ता है या उनके विचारों में असमानता आने से दूरियां बन जाती हैं। मनोवैज्ञानिक कहते हैं, अगर आपकी बहन के साथ आपका मनमुटाव हो गया है तो आपको रिश्ते को सुधारना और फिर से बनाना चाहिए। अपनी बहन के साथ दोस्ती के लिए जगह बनाना, जीवन भर अपनी भावनात्मक, संज्ञानात्मक, आध्यात्मिक और शारीरिक खुशहाली बनाए रखने का सबसे आसान तरीका है।
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आत्मविश्वास बढ़ता है
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आत्मविश्वास बढ़ता है
हर इन्सान को अपने जैसे व्यक्ति की तलाश रहती है, जो उसका हमदर्द हो, उसके राज को राज रख सके, जिससे बेझिझक, बेखौफ होकर अपनी बात साझा की जा सके और जो मुंह पर सच कहने की हिम्मत रखता हो। महिलाओं को भी ऐसे दोस्त की चाहत रहती है, जो जज करने के बजाय उन्हें समझे, उनकी भावनाओं का सम्मान करे, कमजोरियों को नजरअंदाज कर विशेषताओं को देखे, शिक्षक बनकर प्रोत्साहित करे तो डांटने से भी पीछे न रहे।
दिल्ली की स्कूल शिक्षिका मालिनी कहती हैं, "बचपन से मैं अपनी बड़ी बहन शिवांगी के बेहद करीब रही हूं। माता-पिता के शहर से बाहर जाने पर वे मेरा जिस तरह ध्यान रखती थीं, उसे भूल पाना मुश्किल है। उनसे ही सीखा है कि किसी की निस्वार्थ सेवा कैसे की जाती है। दीदी की ईमानदारी एवं साफ दिल की मैं हमेशा कायल रही। उनसे कभी कोई बात छुपाई नहीं। विश्वास था कि वे कभी गलत सलाह नहीं देंगी। 15 वर्ष पहले वे सात समंदर पार जा बसीं, लेकिन जरूरत पड़ने पर आज भी सबसे पहले उन से ही सुझाव मांगती हूं। वह मेरी गाइड, मेंटर और दोस्त, तीनों ही हैं।" अध्ययन बताते हैं कि बहन से सकारात्मक रिश्ता हमारा आत्मविश्वास बढ़ाता है।
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बहनें अच्छी सहेलियां
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बहनें अच्छी सहेलियां
एनिमेशन आर्टिस्ट शुभी कहती हैं, "हर किसी का अपना एक खास व्यक्तित्व होता है। मेरी छोटी बहन रश्मिका और मैं हमेशा से दो बिल्कुल अलग इन्सान रहे हैं। मुझे गुलाबी रंग पसंद है, उसे सफेद। मैं पढ़ाई में अच्छी रही हूं, वह खेलों में। मुझमें धैर्य है, वह तुरंत बेचैन हो जाती है। मैं शांत स्वभाव की हूं और वह बातूनी, लेकिन वह जानती है कि अपनी बातों-विचारों को कैसे सशक्त तरीके से रखना है। मैंने उससे यह सीखा है और इसका मुझे काफी फायदा मिला है। हम बहनों के व्यक्तित्व भले ही अलग हों, लेकिन माता-पिता से एक जैसे संस्कार मिले हैं। उम्र में चार साल का फर्क होने के बावजूद हम अच्छी सहेलियां हैं, क्योंकि दोनों कभी एक-दूसरे का भरोसा नहीं तोड़ती हैं।"
अमेरिका की आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में मानव विकास और पारिवारिक अध्ययन की एसोसिएट प्रोफेसर मेगन गिलिगन की मानें तो बहनों के बीच घनिष्ठ संबंध ज्यादा होते हैं, क्योंकि आम तौर पर महिलाओं के पारस्परिक संबंध अधिक मजबूत होते हैं। वह कहती हैं, "बेटियों को अपनी भावनाओं और संवेदनाओं को ज्यादा अभिव्यक्त करने और पुरुषों की तुलना में रिश्तों को ज्यादा महत्व देने के लिए सामाजिक रूप से तैयार किया जाता है, जबकि बेटों को परिवार के बाहर महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। भाई की तुलना में महिलाएं बहन के रूप में अपनी भूमिका को ज्यादा महत्व देती हैं।"
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कभी प्रतिस्पर्धा भी
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कभी प्रतिस्पर्धा भी
कुछ अध्ययनों से ये भी निष्कर्ष निकले हैं कि बहनों से अधिक नजदीकी तनाव का कारण भी बन जाती है। कई मामलों में देखा गया है कि बहन के रूप में एक-दूसरे से बहुत ज्यादा जुड़े होने से आपके लिए व्यक्तिगत पहचान बनाना मुश्किल हो सकता है। फिल्म अभिनेत्री काजोल ने अपने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि शुरुआत में जब उनकी बहन तनीषा फिल्मों में आई तो उन्हें थोड़ी जलन हुई। दोनों के रिश्ते भी कुछ हद तक प्रभावित हुए, लेकिन फिर बहनों ने आपस में सुलह कर ली। यही खूबसूरती है इस रिश्ते की। कहने का आशय है कि स्वस्थ दोस्ती और रिश्ते में संतुलन बनाने से चीजें आसान हो सकती हैं।
अमेरिका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ सोशल वर्क के प्रोफेसर और एडल्ट सिबलिंग रिलेशनशिप्स के सह-लेखक जेफ्री ग्रीफ कहते हैं, "आप अपने दोस्त चुन सकते हैं, लेकिन अपने भाई-बहन नहीं। वे आपके जीवन में हमेशा साए की तरह रहते हैं, चाहे अच्छा हो या बुरा। हालांकि हमारे अध्ययन के अनुसार, ज्यादातर लोग भाई-बहनों के बहुत करीब होते हैं और उनके साथ अच्छे दोस्त का रिश्ता होना सामान्य है।"