स्कूल में बच्चे दादागिरी क्यों करने लगते हैं?
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भीड़ का लीडर बनना पसंद
रिसर्च के मुताबिक हाल के वर्षों में दादागीरी के मामले में बच्चे ज्यादा शातिर हो गए हैं। वो अब अपनी शख्सियत के इस पहलू का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक कूटनीतिक तरीके से करते हैं। आमतौर पर इन बच्चों का व्यवहार बहुत शालीन होता है। ये अध्यपकों की पसंद बन जाते हैं। लेकिन जब इन्हें जरूरत होती है, तो ऐसे बच्चे अपनी ताकत का इस्तेमाल कर दूसरे बच्चों पर धौंस जमाते हैं। प्रोफेसर स्पेलेज के मुताबिक़ इस तरह के बच्चे भीड़ का लीडर बनना पसंद करते हैं। एक अन्य रिसर्च इस बात पर जोर देती है कि डराने-धमकाने वाले बच्चे दूसरे बच्चों से ज्यादा खुद को तंग करते हैं। इटली और स्पेन में स्कूल के बच्चों को एक एक्सरसाइज कराई गई जिसमें उन्हें या तो किसी पर धौंस जमानी थी, या खुद पीड़ित होना था।
दूसरों पर दादागिरी करने वाले बच्चों का कहना था कि वो खुद ज्यादा प्रभावित हुए हैं। दूसरों को धमकाने के बाद वो खुद मानसिक पीड़ा से गुज़रे हैं। तकनीक के इस दौर में दादागिरी का तरीका भी बदल गया है। अब किसी को सामने से डराना-धमकाना या मारपीट करना ही एक तरीका नहीं है। अब साइबर बुलिंग भी होने लगी है। फर्क सिर्फ इतना है कि साइबर बुलिंग में किसी को बार-बार नहीं धमकाया जा सकता। क्योंकि एक बार सोशल मीडिया पर जो लिख दिया, तो वो एक ही समय में लाखों करोड़ों लोगों तक पहुंच जाता है।
साइबर बुलिंग ज्यादा हो रही है
लेकिन कुछ रिसर्चर इससे इत्तेफाक नहीं रखते। मनोवैज्ञानिक कैली जानी-पेपेसी का कहना है कि स्कूल बुलिंग की तुलना में आज साइबर बुलिंग ज्यादा हो रही है। आज बच्चे क्लासरूम में भी स्मार्ट फोन लेकर जाने लगे हैं। उन्होंने अपनी रिसर्च में पाया है कि अगर बच्चे अगल-बगल बैठे हों, तो भी वो सोशल मीडिया के जरिए धौंस जमाते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करके उन्हें ज्यादा लोग जान पा रहे हैं। उन्हें अपनी ताकत का एहसास होता है।
अगर आपको पता चल जाए कि आपका बच्चा दूसरे बच्चों को बुली कर रहा है तो आपको क्या करना चाहिए?
सबसे पहले तो बच्चे के बर्ताव पर नजर रखनी चाहिए। अगर कहीं से उसकी शिकायत मिलती है, तो उससे प्यार से पूछना चाहिए कि वो ये सब कहां से सीख रहा है। वो ऐसा क्यों कर रहा है। ऐसा करके उसे क्या हासिल हो रहा है। साथ ही मां-बाप को अपने बर्ताव पर भी गौर करना चाहिए। कहीं जाने-अनजाने वो ऐसा बर्ताव तो नहीं कर रहे जिसका गलत असर बच्चे पर पड़ रहा है। स्कूल में ऐसे बहुत से बच्चे होते हैं, जिनके बर्ताव से दूसरे बच्चे डरते हैं। लेकिन अगर स्कूल में सभी बच्चों को मित्रता का माहौल दिया जाए, तो कोई भी बच्चा ना तो बुली करेगा और ना ही बच्चों के मन में भय पैदा होगा। स्कूल स्टाफ और शिक्षक इसमें अहम किरदार निभा सकते हैं।