पढ़ाई छूटी गई, छोटी उम्र में शादी कर दी गई। तभी एक संकल्प लिया और पेश की ममता की ऐसी मिसाल, देखकर सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा।
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मदर्स डे, शीला सैनी की कहानी
मदर्स डे के मौके पर चंडीगढ़ में उतर भारत के क्षेत्रीय जीएसटी आयुक्तालय में बतौर उपायुक्त तैनात ममता सैनी सुना रही हैं, अपनी मां के जुनून की दिलचस्प कहानी। ऐसा जुनून जिसने कामयाबी की नई इबारत लिखी। शीला सैनी, काफी कम उम्र की थी कि जब पारिवारिक हालात के चलते उसका विवाह राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी ओमप्रकाश सैनी के साथ कर दिया गया।
शीला कुछ जमातें ही पढ़ पाई थी कि मायके से ससुराल विदा कर दी गई। लेकिन उसी दिन शीला ने यह ठान लिया था कि यदि उसकी बेटी हुई तो उसके साथ कभी ऐसा नहीं होगा। वह अपनी बेटी को न केवल उच्च शिक्षा दिलवाएगी, बल्कि एक कामयाब अफसर भी बनाएगी। आखिरकार उस मां के सपने और संघर्ष को ममता ने अपना जुनून बनाया और उस सपने को पूरा करने में पूरी शिद्दत से जुट गई।
उधर, ममता सैनी के हवलदार पिता ओमप्रकाश सैनी भी अपनी पत्नी शीला के इस सपने को पूरा समर्थन दिया। पिता भी चाहते थे कि उनकी बेटी इतनी बड़ी अफसर बने कि लोगों को उसका परिचय देते हुए उनका सीना फख्र से चौड़ा हो जाए। आखिरकार वर्ष 2010 में ममता सैनी ने आईआरएस (इंडियन रेवेन्यू सर्विसस) की परीक्षा क्लीयर की और सहायक कमिश्नर के पद पर तैनात हुई।
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mothers day
- फोटो : अमर उजाला
आज तरक्की पाकर ममता सैनी चंडीगढ़ स्थित उतर भारत के क्षेत्रीय आयुक्तालय में में बतौर डीसी (डिप्टी कमिश्नर) तैनात है। अमर उजाला से बातचीत में बातचीत में डीसी ममता सैनी ने बताया कि उनकी कामयाबी के पीछे उनका मां का बड़ा योगदान है। मां जैसा चाहती थी, उन्होंने वैसा अफसर बनकर मां के सपने को पूरा किया। ममता कहती हैं कि उनकी भी एक बेटी कृति है, जिसे वे अपनी मां के सभी संस्कार दे रही हैं।