Chaitra Navratri Day 4 Wishes: इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की द्वितीय और तृतीय तिथि एक ही दिन पड़ी। ऐसे में 1 अप्रैल को देवी के चतुर्थ स्वरूप की पूजा की जा रही है। नवरात्रि के चतुर्थि तिथि को देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा का विधान है, जिनकी साधना करने पर साधक के जीवन से जुड़े सभी कष्ट दूर और कामनाएं पूरी होती है। देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, इस कारण उन्हें अष्टभुजा देवी के नाम से जाना जाता है। उनके साथ हाथों में क्रमश: कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत पूर्ण कलश, चक्र और गदा सुशोभित है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है।
Navratri Day 4 Wishes: मां कूष्मांडा के मंत्र जाप के साथ करें चतुर्थ नवरात्रि की शुरुआत, भेजें भक्तिमय संदेश
चतुर्थ नवरात्रि की शुरुआत मां कूष्मांडा के स्मरण के साथ करें। उनके बीज मंत्र का जाप और आराधना करें। साथ ही अपने परिजनों और करीबियों को मां कुष्मांडा के मंत्र, श्लोक आदि को भेजकर नवरात्रि के चौथे दिन की शुभकामना दें।
मां कूष्मांडा पूजन मंत्र
सुरासंपूर्णकलशं, रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां, कूष्मांडा शुभदास्तु मे।
मां कूष्मांडा का बीज मंत्र
ऐं ह्री देव्यै नम:
मां कूष्मांडा का प्रिय भोग
देवी कूष्मांडा की पूजा के साथ भोग अर्पित करना चाहते हैं तो मालपुए का भोग लगाएं। नवरात्रि के चौथे दिन मालपुए का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
मां कूष्मांडा का स्वरूप
मां दुर्गा का चौथा स्वरूप मां कूष्मांडा का है जो भय, रोग, शोक को दूर करने वाली जगतजननी हैं। मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, इस कारण उन्हें अष्टभुजाधारी भी कहते हैं। उनके हाथों में कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत पूर्ण कलश, चक्र और गदा सुशोभित है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है।