नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि में इस साल 15 अप्रैल को मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा ने ये स्वरूप दानवों का संहार करने के लिए धरा था। ऐसे में जो भी व्यक्ति माता रानी के इस रूप की सच्चे मन से पूजा करता है, उसके सभी दुखों का नाश होता है। कालरात्रि देवी अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करती हैं, यही वजह है कि इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।
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नवरात्रि के सातवें दिन यानी सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा होती है। इस बार 15 अप्रैल को सप्तमी की पूजा की जाएगी।
दुर्गा के नौ रूपों में सातवां रूप हैं देवी कालरात्रि का। इसलिए नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है।
मंत्र
ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम: .
ॐ कालरात्र्यै नम:
ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा।
ध्यान मंत्र
एकवेणी जपाकर्ण, पूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी, तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा, कालरात्रिभयंकरी॥
मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।
काल के मुह से बचाने वाली ॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।
महाचंडी तेरा अवतार ॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा ।
महाकाली है तेरा पसारा ॥
खडग खप्पर रखने वाली ।
दुष्टों का लहू चखने वाली ॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।
सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥
सभी देवता सब नर-नारी ।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी ।
ना कोई गम ना संकट भारी ॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें ।
महाकाली मां जिसे बचाबे ॥
तू भी भक्त प्रेम से कह ।
कालरात्रि मां तेरी जय ॥