19वी सदी में पूरी भारतीय परंपरा और दर्शन के उलट आध्यात्म और जीवन के प्रति अपने सबसे क्रांतिकारी और विद्रोही विचारों वाले आचार्य रजनीश यानी की ओशो का आज जन्मदिन है। आज यदि ओशो जीवित होते तो उनकी उम्र तकरीबन 88 साल होती। कम उम्र में ही जीवन से विदा लेने वाले ओशो अपने विचारों के साथ ही जीवन शैली को लेकर भी दुनिया में चर्चित रहे।
ओशो का ना केवल जीवन बल्कि जीवन दर्शन भी बहुत ही विवादित रहा। विशेष रूप से उन्होंने त्याग की भावना के उलट संभोग के रास्ते ही आध्यात्म मार्ग की राह सुझाई। संभोग से समाधि पर दिए गए उनके प्रवचन जो किताब रूप में प्रकाशित भी हुए वह पूरी दुनिया में चर्चित हुए। आज भी ओशो का सारा दर्शन इसी मूल बिंदु के केंद्र में है। आइए जानते हैं क्या कहा था ओशो ने यौन संबंधों और समाधि को लेकर:
ओशो ने सेक्स को ही समाधि तक पहुंचने की सीढ़ी बता दिया। उनकी विचारधारा समाज को चुनौती देती है। जो लोग ओशो के बारे में ज्यादा नहीं जानते उनके लिए ओशो का नाम दुनियाभर के प्रसिद्ध बाबाओं और गुरुओं में से ही एक हैं। उनके लिए ओशो की पहचान एक ऐसी विवादित शख्सियत की है, जिन्होंने हमेशा बेरोकटोक जीवन और मुक्त सेक्स जैसी बातों का समर्थन किया।
ओशो कहते हैं कि प्रेम का प्राथमिक बिंदु सेक्स ही है और जो लोग सेक्स को घृणा के नजरिए से देखते हैं, वे कभी प्रेम कर ही नहीं सकते। ओशो के मुताबिक संभोग और समाधि के बीच एक सेतु है, एक यात्रा है, एक मार्ग है। समाधि जिसका अंतिम छोर है और संभोग उस सीढ़ी का पहला सोपान है।
ओशो ने कहा है कि हमने सेक्स को सिवाय गाली के आज तक दूसरा कोई सम्मान नहीं दिया। हम सेक्स की बात करते वक्त भी भयभीत होते हैं। लेकिन सच तो ये है कि मनुष्य के जीवन में इससे ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ है ही नहीं।