फैशन हर दिन रंग बदलता है। पियर्सिंग भी इसी फैशन का एक हिस्सा है। आज से कई साल पहले यह कबीलों या गाँव कस्बों में परम्परा या संस्कृति का हिस्सा रहा है। आज भी बची खुची जगहों पर इसे देखा जा सकता है लेकिन अब इसका एक आधुनिक स्वरूप भी है। वह है फैशनेबल तरीकों के साथ लोगों का पियर्सिंग को अपनाना। नाभि, कान, नाक तो आम हैं ही, भौंहें, जुबान, ओठ और यहां तक कि प्राइवेट पार्ट्स तक में पियर्सिंग का ट्रेंड अब सामान्य बात है। लेकिन फैशन से इतर इसका एक खतरनाक स्वरूप भी है।
Oral Health: पियर्सिंग से होने वाले नुकसान जानें, दांतों और मसूढ़ों में हो सकता है ये असर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ओरल हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी
अक्सर लोग यह समझते हैं कि दाँत शरीर का वह हिस्सा हैं जिनपर अधिक ध्यान न दिया जाए तो भी वे चलते रहेंगे। इसलिए ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास तब जाते हैं जब दांतों या मसूढ़ों में कोई बड़ी समस्या आ जाती है। ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो सलाना दांतों का रूटीन चैकअप करवाते हैं। छोटी-मोटी तकलीफ होने पर अक्सर लोग खुद ही घरेलू नुस्खों या ओवर द काउंटर दवाइयों से उसे दूर करने की कोशिश करते हैं और इस कोशिश में कई बार दांतों और मसूढ़ों को और भी अधिक नुकसान पहुंचा बैठते हैं। इसी तरह मुंह या इसके आस-पास पियर्सिंग करवाते समय भी लोग यह भूल जाते हैं की इससे उस हिस्से के काम करने की प्रक्रिया में बाधा भी पहुंच सकती है। इसलिए जरूरी है कि कोई भी नया प्रयोग करते समय हम स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखें।
ऐसे होता है नुकसान
जुबान के भीतर, ऊपर या ओठों पर कहीं भी पियर्सिंग करवा लेने के बाद भले ही वह आपको बाहर से सुंदर लगे लेकिन मुंह के भीतर उसकी वजह से मुश्किल खड़ी होने लगती है। अध्ययन बताते हैं कि ओरल पियर्सिंग करवाने वाले कई लोगों में दांतों के बीच गैप आने की समस्या होने लगती है। इसके साथ ही मसूढ़ों से खून आने, मसूढ़ों के टिशू के ढीला होकर दांतों पर पकड़ छोड़ने और दांतों की जड़ों में पॉकेट्स (खाली जगह) बनने की शिकायत भी होने लगती है।
समय के साथ बढ़ती है समस्या
यह शिकायत एक दिन में नहीं पनपती। दांतों और मसूढ़ों में समस्या धीरे धीरे आकार लेती है। विशेषज्ञों के अनुसार जुबान पर की गई पियर्सिंग से उन जगहों पर पहले मुसीबत होनी शुरू होती है जहाँ जुबान बार बार टकराती है। बोलते हुए, खाते हुए या अन्य तरह से जुबान दांतों से टकरा कर तकलीफ की शुरुआत कर देती है। जुबान पर करवाई गई पियर्सिंग खासतौर पर दांतों की नीचे की लाइन में मौजूद आगे के दांतों को नुकसान पहुंचाती है। इन दाँतों को मेंडिब्यूलर इंसीजर्स कहा जाता है और ये भोजन को काटने और चबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसलिए भी है खतरा
पियर्सिंग करवाने वाले और करने वाले भी चाहे जितना भी इस बात पर दावा करें कि वे जो गहने या चीजें पिर्यसिंग वाली जगह पर पहना रहे हैं वे पूरी तरह सेफ हैं, लेकिन असल में होती तो यह मैटल की ही हैं। और मैटल की वस्तुएं किस तरह नुकसान पहुंचा सकती हैं यह बताने के लिए कोई रॉकेट साइंस नहीं लगता। मुंह के भीतर भी लगातार नमी में रहने, बंद जगह पर रहने और दांतों से टकराने की वजह से ये तकलीफ का कारण बन सकती हैं। वहीं ओठों पर यह सीधे त्वचा के सम्पर्क में आती हैं और जरा सी भी असावधानी इन्हें खतरनाक बना सकती है।