Janmashtami 2025: इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को मनाई जा रही है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा होती है, क्योंकि इसी तिथि में कन्हैया का जन्म हुआ था। उनके कई अलग अलग नामों से पुकारा जाता है, जिसमें कृष्ण के बाल स्वरूप बाल गोपाल या लड्डू गोपाल कहलाता है। कृष्ण भक्त जो अपने घर पर कान्हा की पूजा करते हैं वह बाल स्वरूप में लड्डू गोपाल को घर के मंदिर में रखते हैं।
कान्हा का बाल स्वरूप काफी मनमोहक है, जो भी एक बार उन्हें देखे तो देखता ही रह जाए। मान्यता है कि लड्डू गोपाल के दर्शन मात्र से ही चेहरे पर मुस्कान और आत्मा को तृप्ति मिल सकती है। ऐसे में कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर लड्डू गोपाल की मनमोहक छवि वाले पोस्टर अपने करीबियों, रिश्तेदारों और दोस्तों को भेजकर शुभकामनाएं दे सकते हैं। साथ ही श्रीकृष्ण के दर्शन कराकर उनका आशीर्वाद अपने प्रियजनों तक भेज सकते हैं। यहां कान्हा के बाल स्वरूप की सुंदर और आकर्षक छवि वाले पोस्टर दिए जा रहे हैं, जिसे प्रियजनों के साथ शेयर करें और अपने मोबाइल में सेव करें ताकि जब चाहें लड्डू गोपाल के दर्शन कर पाएं।
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बाल गोपाल के अनेक नाम
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माखन खाते बाल गोपाल
लड्डू गोपाल को माखन अति प्रिय था। उनके खुद के घर पर सैकड़ों गाय थीं लेकिन वह पूरे गांव में बसे घर से माखन चोरी करके खाते थे। उनकी ये बाल लीलाएं आज भी कथा की तरह सुनाई जाती हैं। नंदलाल की माखन खाती छवि इतनी आकर्षक थी कि उन्हें देख गोपियां और गांव की माताएं मग्नमुग्ध हो जाया करती थीं। जन्माष्टमी के इस पोस्टर को मोबाइल के कवर या वाॅलपेपर पर लगा सकते हैं।
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कृष्ण जन्माष्टमी की तस्वीरें
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मोरपंख धारण किए नंदलाल
मस्तक पर मोरपंख धारण किए कान्हा केवल गोकुल वृंदावन वासियों के ही प्रिय नहीं थे, बल्कि सभी जीव-जंतु के भी लाडले थे। गाय-बकरी से लेकर हिरण, पक्षी और मोर तक सभी कान्हा की इस छवि में लीन हो जाया करते थे। देवकीनंदन श्रीकृष्ण की इस सुंदर छवि वाला पोस्टर करीबियों में शेयर करें।
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कृष्ण जन्माष्टमी की तस्वीरें
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वर्षा का आनंद लेते कान्हा
माता देवकी और वासुदेव ने अपनी आठवीं संतान के रूप में कृष्ण को मथुरा स्थित कंस की कारागार में जन्म दिया था। उस रात्रि घनघोर वर्षा हो रही थी। यमुना नदी उफान पर थी। वासुदेव जी ने नवजात शिशु कान्हा को टोकरी में बैठाकर उसे सिर पर रखा और नदी पाक करके गोकुल में नंद और यशोदा मां के घर पहुंचे। कहते हैं कि नवजात कन्हैया तभी से चमत्कार दिखाने लगे थे। उनकी ये छवि कन्हैया के जन्म के दिन की याद दिलाती है।
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कृष्ण जन्माष्टमी की तस्वीरें
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मुरली बजाते यशोदा के लाला
माता यशोदा के पुत्र कान्हा की छवि उनकी मुरली के बिना अधूरी है। श्रीकृष्ण हमेशा बांसुरी साथ रखते थे और जब गाय चराने के लिए जंगल जाते तो बांसुरी बजाया करते । उनकी बांसुरी की धुन सुनकर राधा जी, गोपियां, गांववासी और यहां तक की गाय बकरी तक मनमुग्ध हो जाया करती थीं।