भारत एक ऐसा देश है जहां पर हमेशा से सयुंक्त परिवार को अहमियत दी जाती है। हमारे देश में दादा-दादी, माता पिता, बच्चे यहां तक की चाचा-चाची और ताउ सभी से भरापूरा परिवार होता है। जहां पर छोटों को प्यार और बड़ों को सम्मान दिया जाता है। लेकिन आज के बदलते दौर में हमारे देश में भी ज्यादातर लोग कभी काम की वजह से या फिर कुछ और कारणों से एकल परिवार में रहना पसंद करते हैं। जिसकी वजह से हमारे बुजुर्गों की अनदेखी होने लगी है। वृद्धावस्था जीवन का एक ऐसा पड़ाव है जो ज्यादातर लोगों की जिंदगी में आता है इसलिए हमें बुजुर्गों को सम्मान और प्यार देना चाहिए। ये हम बुजुर्गों के लिए नहीं बल्कि अपने लिए करते हैं। क्योंकि जब हम कोई कार्य करते हैं तो वही हमारे बच्चे भी हमसे सीखते हैं। इसलिए अपने बच्चों में अच्छे संस्कार डालने के लिए आपको अपने घर के बड़े बुजुर्गों को सम्मान और प्यार देना चाहिए।
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अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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आज के समय में लोग अपनी परेशानियों का हवाला देकर अपने माता-पिता को दरकिनार कर देते हैं। जबकि उम्र के इस पड़ाव में उनको अपनों के प्यार और देखभाल की सबसे ज्यादा जरुरत होती है। कुछ लोग अपने घर को बुजुर्गो को या तो घर में इस तरह से रखते हैं जैसे उनकी कोई अहमियत न हो या फिर उन्हें बेकार समझकर वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं। लेकिन हमेशा ये याद रखना चाहिए कि बुजुर्ग हमारे घर के स्तंभ की तरह होते हैं। जो हमसे कभी अलग नहीं हो सकते उन पर ही हमारा घर टिका होता है। इसलिए उनकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। अगर आप अपने घर के बुजुर्गो की उपेक्षा करते हैं तो आपको भी आने वाले समय में अपने बच्चों से उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
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Grandparents
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आज के समय में या तो लोग अपने माता-पिता से अलग रहते हैं या फिर उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ा आते हैं। जिसके कारण बुजुर्ग अपने आप को अकेला और निसहाय महसूस करते हैं। बुजुर्गों को अकेले रहने के कारण उनके प्रति अपराध भी बढ़ने लगे हैं। घर में ही नहीं बल्कि बाहर भी बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। आज के समय में घरों में ही नहीं लोग बाहर भी बुजुर्गों के प्रति दुर्व्यव्हार करने से नहीं कतराते हैं। हमारे देश में भी बुजुर्गों की स्थिति चिंताजनक है। 44 प्रतिशत बुजुर्गों के मुताबिक उनके साथ सार्वजनिक स्थानों पर असम्मान का व्यव्हार किया जाता है। हेल्पेज इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ चैरिटीज की ओर से 96 देशों के ग्लोबल एज वॉच इंडेक्स जारी किया गया है जिसमें भारत को 71 वां स्थान दिया गया है। यह स्थिति भारत में बुजुर्गों के प्रति होने वाली उपेक्षा को दर्शाती है।
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एक सर्वे के अनुसार जो बच्चे अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रहते हैं वे अपने स्कूल आदि में ज्यादा अच्छी तरह से परफॉर्म कर पाते हैं। अकेले रहने वाले बच्चो की तुलना में अपनें दादा-दादी और नाना-नानी के साथ रहने वाले बच्चों में आत्मविश्वास भी अधिक होता है। क्योंकि आज के समय में पति-पत्नी दोनों ही काम करते हैं, जिसके कारण बच्चे घर में अकेले रह जाते हैं। आज के समय में इसी कारण से बच्चों में कम उम्र में ही अवसाद जैसी समस्याएं देखने को मिलती है। बुजुर्गों के लिए न सहीं कम से कम अपने बच्चों के लिए अपने माता-पिता को प्यार और सम्मान देना चाहिए।