इस बार दिवाली और बाल दिवस एक ही दिन है। बाल दिवस, वो दिन होता है जब हम बच्चों को खास महसूस करवाते हैं और दिवाली, वो पर्व है जब अंधकार को रोशनी से मिटाया जाता है। इन दोनों दिनों का एक साथ होना कितना शुभ संयोग है। चूंकि दिवाली बड़ा त्योहार है तो यह बहुत सामान्य है कि इस दिन माता-पिता व्यस्त ही रहेंगे, बच्चों को बाहर ले जाना या उनके लिए अलग से समय निकालना तो संभव ही नहीं हो सकता लेकिन फिर भी कुछ छोटी-मोटी चीजें करके आसानी से बच्चों को समर्पित इस दिन को खास बनाया जाता है। अगली स्लाइड्स से जानिए कि किस तरह से कुछ सामान्य चीजें करके भी आप बच्चों को फील करा सकते हैं स्पेशल।
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Children's day 2020: दिवाली की व्यस्तताओं के बावजूद बाल दिवस पर इस तरह से बच्चों को फील करवाएं स्पेशल
Sat, 14 Nov 2020 02:17 AM IST
तेजस्वी मेहता
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: तेजस्वी मेहता
Updated Sat, 14 Nov 2020 02:17 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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-कविता
सवेरे जब बच्चा सोकर उठे तो बड़े प्यार से उठाएं, सिर पर हाथ फेरें, आलिंगन करें, उससे पूछे दिवाली के इतर क्या खास है? उसे बातों-बातों में एहसास करवाएं कि उसका अस्तित्व आपके लिए कितना खास है। रात में ही थोड़ा समय निकालकर कोई कविता लिख लें या फिर कहीं से कोई कविता ढूंढ लें जो उस पर जंचती हो। ऐसी कविता उसे सामने बैठकर सुनाएं। बच्चा पूरा दिन उसी की खुमारी में रहेगा।
सवेरे जब बच्चा सोकर उठे तो बड़े प्यार से उठाएं, सिर पर हाथ फेरें, आलिंगन करें, उससे पूछे दिवाली के इतर क्या खास है? उसे बातों-बातों में एहसास करवाएं कि उसका अस्तित्व आपके लिए कितना खास है। रात में ही थोड़ा समय निकालकर कोई कविता लिख लें या फिर कहीं से कोई कविता ढूंढ लें जो उस पर जंचती हो। ऐसी कविता उसे सामने बैठकर सुनाएं। बच्चा पूरा दिन उसी की खुमारी में रहेगा।
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- फोटो : Pixabay
-पसंदीदा खाना
वैसे तो दिवाली के दिन सभी घरों में पारंपरिक भोजन ही बनता है। लेकिन पारंपरिक भोजन तो शाम की पूजा के लिए बनता है। सुबह तो कुछ भी सामान्य सा ही बनता है। इस सामान्य से भोजन को बच्चे की पसंदीदा भोजन से बदल दें। यदि समय की कमी है तो आप बाहर से ऑर्डर करके भी कुछ बुलवा सकते हैं। बच्चे पसंदीदा खाना खाते हैं तो खुश रहते हैं, उन्हें कोई शिकायत नहीं रहती।
वैसे तो दिवाली के दिन सभी घरों में पारंपरिक भोजन ही बनता है। लेकिन पारंपरिक भोजन तो शाम की पूजा के लिए बनता है। सुबह तो कुछ भी सामान्य सा ही बनता है। इस सामान्य से भोजन को बच्चे की पसंदीदा भोजन से बदल दें। यदि समय की कमी है तो आप बाहर से ऑर्डर करके भी कुछ बुलवा सकते हैं। बच्चे पसंदीदा खाना खाते हैं तो खुश रहते हैं, उन्हें कोई शिकायत नहीं रहती।
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- फोटो : सोशल मीडिया
-कार्ड
हम अक्सर देखते हैं कि घर में किसी का भी कोई खास दिन हो, बच्चे सबसे पहले कार्ड बनाने बैठते हैं क्योंकि उन्हें वो करना अच्छा लगता है। हो सकता है उनके मन में भी ये इच्छा हो कि उन्हें भी कभी कोई कार्ड देकर अच्छा महसूस करवाएं। बच्चों के लिए सामान्य सा कार्ड बनाने में 15 मिनट से अधिक समय नहीं लगता है और यदि फिर भी समय नहीं मिल पाता है तो कार , गुड़िया, खिलौने आदि के शेप में मिलने वाले कार्ड बाजार में उपलब्ध होते हैं, उन्हें खरीदकर अच्छा सा संदेश लिखकर बच्चों को दें। बच्चा जब बड़ा हो जाएगा ,तब इस कार्ड को देखकर बहुत खुश होगा।
हम अक्सर देखते हैं कि घर में किसी का भी कोई खास दिन हो, बच्चे सबसे पहले कार्ड बनाने बैठते हैं क्योंकि उन्हें वो करना अच्छा लगता है। हो सकता है उनके मन में भी ये इच्छा हो कि उन्हें भी कभी कोई कार्ड देकर अच्छा महसूस करवाएं। बच्चों के लिए सामान्य सा कार्ड बनाने में 15 मिनट से अधिक समय नहीं लगता है और यदि फिर भी समय नहीं मिल पाता है तो कार , गुड़िया, खिलौने आदि के शेप में मिलने वाले कार्ड बाजार में उपलब्ध होते हैं, उन्हें खरीदकर अच्छा सा संदेश लिखकर बच्चों को दें। बच्चा जब बड़ा हो जाएगा ,तब इस कार्ड को देखकर बहुत खुश होगा।
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- फोटो : OnePlus
- मूवी
दिवाली के दिन वैसे भी सभी लोग काम में व्यस्त होते हैं तो बच्चे घर में बोर होते रहते हैं और यदि वे शैतानी करते हैं तो उन्हें डांट भी पीट जाती है इसलिए उन्हें व्यस्त रखने और खास महसूस करवाने का तरीका एक ही है। घर की टी.वी पर कोई ऐसी फिल्म लगा दें जो बच्चे को बहुत पसंद हो, फिर देखिए वो आपको बिल्कुल भी परेशान नहीं करेगा और हमेशा के लिए उसे याद भी रहेगा कि दिवाली के दिन जब बाल दिवस आया तो घर पर उसे पसंदीदा फिल्म दिखाई गई थी।
दिवाली के दिन वैसे भी सभी लोग काम में व्यस्त होते हैं तो बच्चे घर में बोर होते रहते हैं और यदि वे शैतानी करते हैं तो उन्हें डांट भी पीट जाती है इसलिए उन्हें व्यस्त रखने और खास महसूस करवाने का तरीका एक ही है। घर की टी.वी पर कोई ऐसी फिल्म लगा दें जो बच्चे को बहुत पसंद हो, फिर देखिए वो आपको बिल्कुल भी परेशान नहीं करेगा और हमेशा के लिए उसे याद भी रहेगा कि दिवाली के दिन जब बाल दिवस आया तो घर पर उसे पसंदीदा फिल्म दिखाई गई थी।