दूसरी बातों के भविष्य के विपरीत प्रेम का भविष्य मेटाफिजिक्स के घेरे में रहेगा - सूक्ष्म और गूढ़।
Relationship After Corona Era: कोरोना महामारी के बाद कैसा होगा प्यार, सेक्स, रोमांस?
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उन्हें लगा कि उन्हें उस आदमी से प्यार है और उसके साथ दो दिन बिताना चाहते थे। लेकिन तब तक लॉकडाउन हो गया और एक महीने तक वे वहीं फंस गए। जब अप्रैल में वापस दिल्ली लौटे तब तक उनका भ्रम टूट चुका था। एक दूसरे के साथ होना एक दूसरे के साथ फंस जाने जैसा हो गया था। सोशल डिस्टंसिंग अब एक दूसरे से दूरी में तबदील हो गई थी। अब वो दिल्ली वापिस लौट आए हैं। साथ में फोन है और कई प्रेमी भी। वो ज्यादातर एक दूसरे के साथ चैट करते हैं।
वीडियो डेटिंग
कोरोना महामारी के बाद प्यार करना कितना बदल जाएगा। क्या प्रेम और सेक्स अलग-अलग चीजें होंगी? कभी-कभी वीडियो के जरिए ही थोड़ा बहुत प्यार भी करते हैं। प्रेम का भविष्य कल्पना का मोहताज नही है। लोग परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को ढाल लेते हैं।
इसी तरह हम भविष्य में कदम रखते हैं। ई-हारमनी, ओके क्यूपिड और मैच जैसे डेटिंग प्लैटफॉर्म पर लॉकडाउन के दौरान वीडियो डेटिंग में काफी वृद्धि हुई है। कई दूसरी बातों के भविष्य पर बहस हो रही है। धर्म, पर्यटन, शिक्षा, वगैरह। लेकिन प्रेम का भविष्य?इसकी बात कुछ और है। ब्रिटेन में लॉकडाउन की शुरुआत मे ही सरकार ने लोगों को सलाह दी कि वो अपने लवर के साथ ही रहें।
एक दूसरे के घर आने-जाने से वायरस का संक्रण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। यूरोप में ऐसे कई प्रस्ताव आए। मई में नीदरलैंड की सरकार ने अकेले रहने वाले लोगों से कहा कि वो अपने लिए सेक्स पार्टनर खोज लें। साथ ही यह सलाह भी दी कि दोनों मिल कर ये भी तय कर लें कि वो और कितने लोगों से मिलेंगे। क्योंकि वो जितने ज्यादा लोगों से मिलेंगे कोरोना संक्रमण का खतरा भी उतना ज्यादा बढ़ेगा। एक सलाह यह भी थी कि 'दूसरों के साथ दूरी बना कर सेक्स करें।' कुछ सुझाव यह भी थे के औरों के साथ मिल कर हस्तमैथुन करें या फिर कामुक कहानियां पढ़ें।
वीडियो चैट्स अब आम हो चुके हैं। और फोन सेक्स भी। रेस्तरां बंद होने की वजह से वास्तविक डेटिंग संभव नहीं है। लिहाजा डेटिंग, शादियां और यहां तक की सेक्स भी वर्चुअल दुनिया में होने लगा है। ये मानो किसी भयानक भविष्य की तस्वीर हो। लेकिन आने वाले कल की हर तस्वीर नए आयाम लेती रहती है, नई शक्ल में बनती ढलती है।
डेटिंग ऐप्स
तारीख 20 अप्रैल थी। बेंगलूरू की एक सुहानी शाम। 33 साल का एक आदमी अपनी बालकनी में टेबल पर वाइन की एक ग्लास के साथ मोमबत्ती जला कर बैठा था। ये वीडियो डेट थी। डेटिंग ऐप बंबल पर। वो पहले भी डेटिंग ऐप का इस्तेमाल करते रहे हैं लेकिन कभी ज्यादा समय नहीं बिताया था वहां। दरअसल, अपनी स्टार्टअप कंपनी के काम में इतना व्यस्त रहे कि समय नही मिल पाया।
लेकिन लॉकडाउन शुरू होने के बाद वो एक साथी की तलाश में इस ऐप का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे। और साथी उन्हें मिल भी गई। शुरुआत में बस एक दूसरे को पिंग करते या चैट करते रहे। धीरे-धीरे बातों का सिलसिला लंबा होता गया। और उसके बाद ये डेट तय हुई।
वो भी अपनी बालकनी में बैठी थी और ये अपनी बालकनी में। ये मुलाकात चालीस मिनट तक चली। और लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद अंतत: वो वास्तव मे मिले। लड़के के घर की छत पर। वो मास्क पहन कर आई थी। जैसे लोग गले मिलते हैं वैसे तो नही, कुछ फासले से मिले। बस उनकी कुहनियां एक दूसरे से छू गईं। लड़के ने कहा, "फिलहाल इतना ही सही।"