चीन और यूरोप के कुछ हिस्सों में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामले अन्य देशों के लिए भी अलार्मिंग हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरह के ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट BA.2 (स्टील्थ ओमिक्रॉन) के केस बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं, ऐसे में सभी को सावधान हो जाना चाहिए। कोरोना का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है, ऐसे में आपकी थोड़ी से भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। अध्ययनों में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक बताया जा रहा है। यही कारण है कि लोगों को आहार में कई तरह की विटामिन्स वाली चीजों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है जिससे कि इम्युनिटी पावर को मजबूत किया जा सके।
अध्ययन: विटामिन-सी और डी के अलावा इस पोषक तत्व की कमी भी बढ़ा देती है कोविड-19 का खतरा, बरतें सावधानी
कोविड-19 और जिंक का संबंध
शोधकर्ताओं का कहना है कि जिंक एक ट्रेस मिनिरल है, जिसका अर्थ है कि शरीर को इसकी थोड़ी मात्रा की आवश्यकता होती है, लेकिन इसकी कमी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकती है। शरीर में कुछ माइक्रो-मॉलीक्यूलर एंजाइम्स जिंक का उपयोग खुद को सक्रिय करने और शरीर को बाहरी क्षति से बचाने के लिए करते हैं। ये एंजाइम्स किसी बाहरी रोगजनक को श्वसन पथ में प्रवेश करने और शरीर को क्षति पहुंचाने से रोकते हैं। ऐसे में जिन लोगों में इस खनिज की कमी होती है, उन्हें संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है।
इम्युनिटी के लिए जिंक की आवश्यकता
कई अन्य अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में भी जिंक की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिंक की पर्याप्त मात्रा कोविड-19 में स्वाद और गंध की कमी को नियंत्रित करने में भी रोगियों की मदद कर सकती है। इम्युनिटी के लिए जिंक की आवश्यकताओं को देखते हुए शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में इसकी कमी होती है उनमें कोरोना संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता काफी बढ़ जाती है।
शरीर के लिए जिंक की आवश्यकता
अन्य पोषक तत्वों की ही तरह जिंक का सेवन सुनिश्चित करना भी शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। मुख्यरूप से यह खनिज, घावों को ठीक करने और स्वाद-गंध की भावना को नियंत्रित करने में मदद करता है।
चिकित्सा मानकों के अनुसार एक वयस्क पुरुष को प्रतिदिन 11 मिलीग्राम वहीं महिला को कम से कम 8 मिलीग्राम जिंक का सेवन अवश्य सुनिश्चित करना चाहिए। जिंक सेलुलर विकास में भी मदद करता है, यही कारण है कि बचपन और गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त मात्रा में जिंक के सेवन की सलाह दी जाती है।
जिंक की कमी का खतरा
जिन लोगों को पाचन संबंधी विकार जैसे इंफ्लामेटरी बाउल डिजीज या गैस्ट्रो की समस्या होती है, उनके शरीर में स्वाभाविक रूप से जिंक का अवशोषण प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा क्रोनिक किडनी डिजीज और लिवर की परेशानियों वाले लोगों में भी जिंक की कमी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को भी जिंक की कमी का खतरा होता है। ऐसे लोगों को आहार पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।