कैंसर के बढ़ते मामले वैश्विक स्वास्थ्य के लिए जोखिम बने हुए हैं। हर साल लाखों लोगों की मौत कई तरह के कैंसर के कारण हो जाती है। हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि दुनियाभर में पैंक्रियाटिक कैंसर (अग्नाशय में होने वाले कैंसर) के मामले भी बढ़ रहे हैं। साल 2020 के डेटा से पता चलता है कि इस वर्ष दुनियाभर में अग्नाशय के कैंसर से लगभग 470,000 मौतें हुईं। डॉक्टर कहते हैं, पेट में होने वाले इस कैंसर के लक्षण आमतौर पर कई प्रकार की अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं। यही वजह है कि अक्सर लोग इस समस्या पर ध्यान नहीं देते और इसका आमतौर पर निदान आखिरी के चरणों में होता है जहां से रोगी की जान बचा पाना काफी कठिन हो सकता है।
World Pancreatic Cancer 2024: अक्सर रहती है पीलिया और पेट दर्द की दिक्कत, ये अग्न्याशय कैंसर का संकेत तो नहीं?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अग्नाशय कैंसर के लक्षण आमतौर पर तब तक नजर नहीं आते हैं जब तक कि यह फैल न जाए या फिर गंभीर चरणों में न पहुंच जाए। हालांकि कुछ संकेत हैं जिनपर अगर समय रहते ध्यान दे दिया जाए तो इसकी कुछ हद तक पहचान की जा सकती है।
पहले इस कैंसर के बारे में जानिए
पैंक्रियाटिक कैंसर भले ही पेट में होता है पर इसे स्टमक कैंसर (पेट का कैंसर) नहीं माना जा सकता है। अग्नाशय पेट के निचले हिस्से के पीछे स्थित होता है। यह भोजन को पचाने में मदद करने वाले एंजाइम और रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करने वाले हार्मोन बनाता है। इस अंग की कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि के कारण कैंसर की दिक्कत शुरू होती है।
अग्नाशय का कैंसर, इस अंग की कोशिकाओं के डीएनए में होने वाले परिवर्तन के कारण होता है। शुरुआत में इसमें आपको पेट दर्द या इससे संबंधित दिक्कतें होती रह सकती है, जिसपर लोग ध्यान नहीं देते हैं। यही कारण है कि इस कैंसर का समय पर निदान भी नहीं हो पाता है।
कैसे कर सकते हैं इस कैंसर की पहचान?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इस कैंसर के लक्षण आमतौर पर तब तक नजर नहीं आते हैं जब तक कि यह फैल न जाए या फिर गंभीर चरणों में न पहुंच जाए। हालांकि कुछ संकेत हैं जिनपर अगर समय रहते ध्यान दे दिया जाए तो इसकी कुछ हद तक पहचान की जा सकती है।
डॉक्टर बताते हैं, इस कैंसर में आमतौर पर आपको पेट में दर्द बना रहता है जो बगल या पीठ तक फैल जाता है। इसके अलावा अगर आपको भूख न लगने, वजन कम होने की समस्या भी कुछ समय से हो रही है तो सावधान हो जाना चाहिए। कैंसर के बढ़ने की स्थिति में आपको मूत्र के रंग में गहरापन या हल्के रंग का मल होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इन संकतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
अक्सर होने वाले पेट दर्द और पीलिया को न करें इग्नोर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपको अक्सर पेट में दर्द की समस्या बनी रहती है तो समय रहते इसका निदान जरूर करा लें, इसके लिए कई अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं जिसमें से कैंसर भी एक है। अक्सर होते रहने वाला पेट दर्द जो आसपास भी फैल जाता है, इसपर गंभीरता से ध्यान दें।
कैंसर के शुरुआती या आगे के चरणों में त्वचा और आंखों के सफेद भाग के पीला पड़ने (पीलिया) की समस्या भी होती है। जिन लोगों को अक्सर पीलिया बनी रहती है उन्हें इसका समय रहते निदान करा लेना चाहिए। हाथ या पैर में दर्द और सूजन बने रहना भी अलार्मिंग संकेत है।
कैसे करें इससे बचाव?
अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ लोगों में इस प्रकार के कैंसर का खतरा अधिक होता है। जिन लोगों में अग्नाशय के कैंसर का पारिवारिक इतिहास रहा है उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। धूम्रपान करने वाले लोगों में इस कैंसर के मामले अधिक देखे जाते रहे हैं। वहीं टाइप-2 डायबिटीज की अनियंत्रित बनी रहने वाली स्थिति भी आपके लिए खतरनाक है।
डॉक्टर कहते हैं, कैंसर सहित कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचे रहने के लिए धूम्रपान छोड़ना सबसे जरूरी है। इसके अलावा वजन को नियंत्रित बनाए रखना भी जरूरी है। इन दो उपायों की मदद से आप कैंसर सहित कई अन्य क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याओं से बचे रह सकते हैं।
-------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।