कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण दुनियाभर के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। राहत की बात यह है कि भारत, ब्रिटेन, रूस, अमेरिका जैसे कई देश कोरोना की वैक्सीन तैयार करने के करीब हैं। कोरोना महामारी को मात देने के लिए दुनियाभर में 120 से ज्यादा वैक्सीन कैंडिडेट पर काम हो रहा है, जिनमें से 20 से ज्यादा वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल की फेज में हैं। रूस ने इसी महीने वैक्सीन फाइनल कर लेने और अक्तूबर में व्यापक स्तर से टीकाकरण अभियान शुरू करने का दावा किया है तो वहीं ब्रिटेन, चीन, अमेरिका आदि देशों ने भी जल्द वैक्सीन उपलब्ध कराने का दावा किया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वैक्सीन की रेस में अमीर और शक्तिशाली देश आगे जा रहे हैं और वैक्सीन प्राप्त करने में ऐसे देश गरीब देशों से काफी आगे निकल जाएंगे।
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क्या अमीर देशों को पहले मिलेगी कोरोना वैक्सीन और गरीब देश रह जाएंगे पीछे? दुनिया की जरूरत 700 करोड़ खुराक
Tue, 04 Aug 2020 07:32 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Tue, 04 Aug 2020 07:32 PM IST
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Coronavirus Vaccine Update: कोरोना वायरस वैक्सीन
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
Corona Vaccine Update
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
- खबरों के मुताबिक, साल 2009 में जब स्वाइन फ्लू फैला था, तो भी धनवान देश आगे निकल गए थे, जबकि गरीब देश पीछे रह गए थे। कोरोना वायरस वैक्सीन के बारे में भी यही बात कही जा रही है कि इस रेस में शक्तिशाली और अमीर देश ही आगे जा रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादा सुविधा और संसाधन संपन्न देशों ने कोरोना वायरस वैक्सीन की एक अरब से अधिक खुराक को अपने लिए पहले से ही रिजर्व करने की व्यवस्था कर ली है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- हाल ही में ब्रिटेन और अमेरिका और ब्रिटेन ने सैनोफी और उसके सहयोगी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन पीएलसी से वैक्सीन की आपूर्ति पर करार किया है। वहीं, दूसरी ओर जापान और फाइजर इंक के बीच भी नई साझेदारी हुई है।
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कोरोना वैक्सीन
- फोटो : social media
- वैक्सीन प्राप्त करने के लिए यूरोपीय संघ आक्रामक कदम उठा रहा है। मालूम हो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय समूह और कई देश कोरोना वैक्सीन को किफायती और सभी के लिए सुलभ बनाने का वादा कर रहे हैं। हालांकि दुनिया भर में करीब सात अरब से ज्यादा लोगों को इस वैक्सीन के खुराक की जरूरत पड़ेगी, जिसके लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।
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Vaccine Company Moderna
- फोटो : Instagram
- साल 2009 में जब स्वाइन फ्लू फैला था, तो उस समय भी ऐसी स्थिति देखने को मिली थी। इसकी वैक्सीन की आपूर्ति पर धनवान देशों का एकाधिकार स्थापित हो गया था। कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे में आर्थिक तौर पर गरीब और कमजोर देशों के प्रति चिंता बढ़ रही है। वे देश इस वैश्विक महामारी से लड़ाई में पिछड़ सकते हैं।