मेंटल हेल्थ की समस्याएं वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बनी हुई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सेहत को ठीक रखने की बात आते ही हम हार्ट और ब्रेन को ठीक रखने के लिए तो प्रयास करते रहते हैं पर मानसिक स्वास्थ्य की तरफ लोगों का ध्यान नहीं जाता है। जबकि मेंटल हेल्थ और शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे से सीधे तौर पर संबंधित होते हैं. इनमें से किसी एक में भी होने वाली दिक्कत का असर दूसरे पर हो सकता है।
मेंटल हेल्थ डे 2026: स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन में क्या अंतर है? तीनों की पहचान कैसे करें
World Mental Health Day 2026: स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन अलग-अलग स्थितियां हैं, हालांकि इनके कुछ लक्षण एक जैसे लग सकते हैं। तनाव अक्सर किसी दबाव से संबंधित होता है, एंग्जायटी में लगातार चिंता और आशंका रहती है, जबकि डिप्रेशन में लंबे समय तक उदासी या रुचि की कमी हो सकती है। लगातार परेशानी होने पर विशेषज्ञ से सलाह लें।
आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने, मानसिक समस्याओं से जुड़े कलंक को दूर करने और सही समय पर विशेषज्ञों की मदद लेने के लिए लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्तूबर को मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है।
स्ट्रेस की समस्या के बारे में जानिए
किसी दबाव, चुनौती या मुश्किल परिस्थिति में आपको स्ट्रेस यानी तनाव की दिक्कत हो सकती है। आमतौर पर परीक्षा, नौकरी के दबाव, आर्थिक परेशानी, परिवार में विवाद या समय पर काम पूरा करने की चिंता के कारण आपको स्ट्रेस की दिक्कत हो सकती है।
- तनाव होने पर सिरदर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, चिड़चिड़ापन, नींद की परेशानी और ध्यान लगाने में दिक्कत हो सकती है।
- कुछ लोगों की धड़कन तेज हो जाती है या पेट से जुड़ी परेशानी होने लगती है।
- तनाव लगातार बना रहे तो रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो सकता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
- तनाव अपने आप में हमेशा मानसिक बीमारी नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्या मानसिक रोगों का कारण बन सकती है।
एंग्जायटी में क्या होता है?
एंग्जायटी यानी चिंता में किसी खतरे, समस्या या अनहोनी की आशंका बनी रह सकती है। कई बार चिंता की वजह स्पष्ट होती है, जबकि कुछ लोगों को बिना किसी बड़ी वजह के भी बेचैनी महसूस होती है। लोगों को लगता है कि कुछ गलत होने वाला है, वे बार-बार एक ही बात सोचते हैं या भविष्य को लेकर परेशान रहते हैं।
- इसके साथ दिल की धड़कन तेज होने, पसीना आने, बेचैनी, मांसपेशियों में तनाव और नींद आने में परेशानी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
- जब चिंता जरूरत से ज्यादा हो, उस पर काबू पाना मुश्किल हो और वह कामकाज या रिश्तों पर असर डालने लगे तो ये एंग्जायटी का संकेत हो सकता है।
डिप्रेशन कैसे अलग है?
डिप्रेशन में लंबे समय तक उदासी, खालीपन या निराशा महसूस हो सकती है। पहले जिन कामों में खुशी मिलती थी, उनमें रुचि कम हो सकती है। आपको थकान, नींद और भूख में बदलाव, ध्यान लगाने में परेशानी या खुद को बेकार समझने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
- डिप्रेशन की समस्या रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकती है। हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं और कुछ लोग बाहर से सामान्य दिखाई देते हुए भी इससे जूझ सकते हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से हंसता-बोलता इंसान भी डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।
तीनों में अंतर कैसे पहचानें?
- स्ट्रेस: किसी दबाव या मुश्किल परिस्थिति से जुड़ा तनाव।
- एंग्जायटी: किसी खतरे या अनहोनी की लगातार आशंका और बेचैनी।
- डिप्रेशन: लंबे समय तक उदासी, निराशा या रुचि में कमी।
इन स्थितियों के लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं। लंबे समय का तनाव, एंग्जायटी या डिप्रेशन के साथ भी मौजूद हो सकता है। इसलिए सिर्फ लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान नहीं की जा सकती। अगर परेशानी लगातार बनी हुई है, नींद या कामकाज प्रभावित हो रही है या रोजमर्रा के काम काज में मुश्किल हो रहा हो तो मनोवैज्ञानिक से सलाह लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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