कुष्ठ रोग सदियों से चली आ रही संक्रामक बीमारी है, दुनियाभर में लाखों लोग इस संक्रमण के शिकार हुए हैं। त्वचा पर विकृत घाव होने और तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचाने वाली इस रोग पर अब काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है पर अब भी अफ्रीका और एशिया के कई देशों में कुष्ठ रोग के लाखों रोगी हैं। वैश्विक स्तर पर कुष्ठ रोग को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने, रोगियों को इलाज के लिए प्रेरित करने और कुष्ठ को लेकर फैली सामाजिक कलंक की भावना को दूर करने के उद्देश्य से हर साल जनवरी महीने के आखिरी रविवार को विश्व कुष्ठ रोग दिवस मनाया जाता है।
World Leprosy Day: कुष्ठ रोग को लेकर लोगों में फैली गलत जानकारियां, इन बातों को आप भी तो नहीं मानते हैं सच?
कुष्ठ रोग पाप के कारण होता है, ये ईश्वर का दण्ड है।
कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्री जीवाणु के कारण होने वाली बीमारी है, इसका पाप, ईश्वर के दंड या धर्म से कोई संबंध नहीं है। कुष्ठ रोग एक दीर्घकालिक संक्रमण है जो मांसपेशियों में कमजोरी, त्वचा पर घाव, हाथ, पैर, टांगों और हाथों में सुन्नता की भावना जैसे लक्षणों का कारण बनता है। कुष्ठ रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया बहुत धीरे-धीरे बढ़ते हैं इसलिए संक्रमण के लक्षण दिखने में कई वर्ष लग सकते हैं।
कुष्ठ रोग का कोई इलाज नहीं है
यह पूरी तरह से गलत जानकारी है। कुष्ठ रोग का इलाज संभव है, संक्रमण के इलाज के लिए कई प्रभावी एंटीबायोटिक्स उपलब्ध हैं। वर्ष 1995 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी प्रकार के कुष्ठ रोग के इलाज के लिए मल्टीड्रग थेरेपी विकसित की थी। ये दवाएं संभावित रूप से बैक्टीरिया को मार सकती हैं और बालों के झड़ने, विकृति, विकलांगता, अंधेपन जैसी इस रोग की जटिलताओं को भी रोक सकती हैं।
कुष्ठ रोग से केवल बुजुर्गों में होता है।
कुष्ठ रोग उम्र विशेष पर निर्भर नहीं करता। यह किसी भी समय किसी को भी प्रभावित कर सकता है। कुष्ठ रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया की लंबी ऊष्मायन अवधि (संक्रमण होने के बाद लक्षण दिखने में लगने वाला समय) अधिक होता है, यही कारण है कि इसके लक्षण देर से विकसित होते हैं। ऐसे कई मामले हैं जिनमें कोई व्यक्ति वयस्कता के दौरान संक्रमण से प्रभावित हुआ और बुढ़ापे में उसमें लक्षण देखे गए हैं।
मिथ: कुष्ठ रोग अत्यधिक संक्रामक है और हाथ मिलाने से फैल सकता है।
कुष्ठ रोग अत्यधिक संक्रामक बिल्कुल नहीं है। किसी और से कुष्ठ रोग का संक्रमण होना बहुत दुर्लभ होता है। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं इस संक्रमण से लड़ने के लिए काफी है, हालांकि जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है उनमें संक्रमण हो सकता है। हाथ मिलाने या आकस्मिक संपर्क से आपको कुष्ठ रोग नहीं होता है। मदर टेरेसा के बारे में सोचें जिन्होंने वर्षों तक कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के बीच सेवा की और उन्हें कभी यह बीमारी नहीं हुई।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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