अपना पसंदीदा संगीत सुनना हो या फिर फोन पर बातें करना, सुनने की क्षमता बेहतर होना सबसे आवश्यक माना जाता है। पर दुर्भाग्य से कुछ लोगों को जन्मजात जबकि कुछ को समय के साथ सुनने की क्षमता में कमी आ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हमारे जीवनशैली और आहार का भी सुनने की शक्ति पर प्रभाव पड़ता है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में बधिर और सुनने में अक्षमता वाले लोगों की संख्या 63 मिलियन के करीब है। इस तरह की समस्याओं से बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 3 मार्च को 'विश्व श्रवण दिवस' मनाया जाता है।
World Hearing Day: अगर आपकी भी हैं ऐसी आदतें तो कम उम्र में ही बहरेपन के हो सकते हैं शिकार, अभी से हो जाएं सावधान
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धूम्रपान आपको बना सकती है बहरा
धूम्रपान सिर्फ हृदय और फेफड़ों को ही नहीं कानों को भी गंभीर क्षति पहुंचा सकती है। अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान में पाया जाने वाला निकोटिन कानों में रक्त के संचार को प्रभावित कर देता है, जिसके कारण कान की नाजुक कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आने वाले किशोरों में भी श्रवण हानि के मामले अधिक देखे जाते हैं। धूम्रपान के कारण टिनिटस (कानों के बजने की समस्या) भी बढ़ जाती है।
कॉटन इयरबड्स का ज्यादा इस्तेमाल
यदि आप भी अक्सर रुई के फाहे से कानों की साफ-सफाई करते रहते हैं तो आपकी यह आदत नुकसानदायक हो सकती है। इयरबड्स के प्रयोग में असावधानी के कारण ईयरड्रम्स को छेद सकते हैं जिससे आपके सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। कानों की सफाई खुद से न करें, किसी विशेषज्ञ से इस बारे में सलाह जरूर ले लें।
ईयरफोन-हेडफोन लगाए रहने की आदत
विभिन्न ऑडियो उपकरणों जैसे ईयरफोन-हेडफोन आपके कानों को गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं। इनसे अगर आप तेज संगीत सुनते हैं तो इससे कानों के पर्दे को गंभीर क्षति हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक 60 प्रतिशत या उससे कम वॉल्यूम स्तर पर हेडफ़ोन का इस्तेमाल करना चाहिए। ईयरबड्स की जगह हेडफोन को ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि ईयरबड आपके ईयरड्रम्स के ज्यादा करीब होते हैं जिससे अधिक नुकसान का खतरा होता है।
कानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने की आदत
यदि आपको भी अक्सर कान में दर्द, तेज आवाज सुनाई देने या कानों के गूंजने की समस्या बनी रहती है तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें। इन स्थितियों में तुरंत किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक माना जाता है। खुद से किसी भी दवा या इयरड्रॉप का प्रयोग भी नुकसानदायक हो सकता है। कानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने की आदत बहरेपन का कारण बन सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।