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World Diabetes Day: डायबिटिक फुट में काटनी पड़ सकती हैं पैरों की उंगलियां, ऐसे लक्षण दिखते ही हो जाएं अलर्ट

Mon, 14 Nov 2022 12:11 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 14 Nov 2022 12:11 AM IST
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डायबिटिक फूट की समस्या - फोटो : istock

ब्लड शुगर का लगातार बढ़ा हुआ रहना कई प्रकार की शारीरिक जटिलताओं का कारण बन सकता है। इससे न सिर्फ हृदय रोगों और किडनी की समस्या बढ़ने का खतरा हो सकता है, साथ ही गंभीर स्थितियों में इसमें आपके पैर या इसकी उंगलियां काटनी भी पड़ सकती हैं। डॉक्टर्स कहते हैं, डायबिटीज की गंभीर स्थिति रक्त वाहिकाओं को क्षतिग्रस्त करने लग जाती है, जिसके कारण कई लोगों में डायबिटिक फुट बीमारी का खतरा बढ़ने लगता है। इस स्थिति में पैर की उंगलियां और अन्य हिस्सों में रक्त का प्रवाह प्रभावित हो जाता है जिससे वह हिस्से काले पड़कर अल्सर में बदलने लगते हैं। इस स्थिति पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो प्रभावित हिस्से को काटने तक की भी नौबत आ सकती है।



लखनऊ स्थित डायबिटोलॉजिस्ट डॉ अभिषेक अरुण बताते हैं, डायबिटीज में पैरों को प्रभावित करने वाली यह समस्या, डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण होती है। डायबिटिक न्यूरोपैथी में अक्सर पैरों की नसों को नुकसान पहुंचने लगता है, इसके कारण अक्सर पैरों में दर्द, झुनझुनी और सुन्नता बनी रहती है। ऐसे लक्षणों पर समय रहते ध्यान देना और इसका इलाज कराना आवश्यक हो जाता है।

आइए जानते हैं कि डायबिटिक फुट की समस्या क्यों होती है और इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है?

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डायबिटीज का पैरों में दुष्प्रभाव - फोटो : iStock

डायबिटिक फुट अल्सर की दिक्कत

डॉ अभिषेक बताते हैं, डायबिटिक न्यूरोपैथी की समस्या के शिकार लोगों के पैरों पर इसके संकेत दिखने लगते हैं। इसमें पैरों में रक्त का संचार कम हो जाने के कारण वहां की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं जिसके कारण सड़न और घाव हो सकती है। डायबिटिक फुट अल्सर मधुमेह वाले लगभग 20 प्रतिशत रोगियों में देखी जाती है।

पैरों की उंगलियों, तलवे या ऊपरी सतह पर सड़न और घाव होने की स्थिति में सुधार न होने पर प्रभावित हिस्से की सर्जरी करनी होती है जिससे अन्य हिस्से को बचाया जा सके। इस तरह की समस्याओं को जानलेवा भी माना जाता है। सभी डायबिटिक रोगियों को इसके लक्षणों को लेकर गंभीरता बरतनी चाहिए।

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डायबिटिक फुट में काली पड़ जाती हैं उंगलियां - फोटो : istock

डायबिटिक फुट और अल्सर के लक्षण

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, शुरुआती स्थिति में पैरों में कालापन होने, उंगलियों में सूजन जैसी स्थिति होने लगती है। इस पर ध्यान न देने से समय के साथ इसमें अल्सर होने का खतरा रहता है। इसमें  पैर से डिस्चार्ज होने लग जाता है। कुछ स्थितियों में यह समस्या तेजी से बढ़ने लगती है और पूरे पैर में भी फैल सकती है। पैरों में काले दाग, फफोले, असामान्य सूजन, जलन, लालिमा, नीले निशान और अजीब गंध जैसे लक्षण डायबिटिक फुट और अल्सर का संकेत माने जाते हैं, जिनपर समय रहते ध्यान देने और उपचार की आवश्यकता होती है।

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डायबिटिक फुट की समस्या हो सकती है गंभीर - फोटो : istock

डायबिटिक फुट अल्सर का इलाज

डायबिटिक फुट के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से मिले, दवाइयों की मदद से शुगर लेवल को कंट्रोल करने और संक्रमण के जोखिम को कम करने का प्रयास किया जाता है। पैरों में अल्सर की स्थिति में एंटीबायोटिक्स और इंसुलिन का प्रयोग किया जाता है, हालांकि गंभीर स्थितियों में प्रभावित हिस्से की सर्जरी करके उस हिस्से को निकालना पड़ सकता है। पैरों में संक्रमण बढ़ने की स्थिति में समय पर इलाज न मिल पाने पर संक्रमण के शरीर के अन्य अंगों में फैलने का भी जोखिम रहता है।

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पैरों का सही देखभाल जरूरी - फोटो : pixabay

डायबिटिक फुट की देखभाल और बचाव

डॉक्टर कहते हैं, जिन लोगों को डायबिटिक न्यूरोपैथी की समस्या है उन्हें पैरों के विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। पैरों को गुनगुने पानी और साबुन से धोएं और अच्छी तरह से सुखाना महत्वपूर्ण है, खासकर पंजों के बीच में। पैरों की त्वचा को ठीक से मॉइस्चराइज किया जाना चाहिए। ये दिन में दो से तीन बार जरूर करें। इसके अलावा, नंगे पैर न चलने, सही आकार के जूते पहनने और पैरों को किसी प्रकार की चोट से बचाकर रखना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

यदि आपमें डायबिटिक फुट या अल्सर के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, शुरुआती स्थिति में इलाज के माध्यम से संक्रमण के जोखिम को कम करने और गंभीरता से बचाव करना आसान हो जाता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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