कैंसर, दुनियाभर में सबसे तेजी से बढ़ते घातक रोगों में से एक है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां हालात और भी चिंताजनक हैं। जामा जर्नल की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में हर साल करीब 2 फीसदी की दर से कैंसर के मामलों में इजाफा हो रहा है। पिछले एक दशक में कैंसर के जिन प्रकारों के मामले सबसे तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं, सर्वाइकल कैंसर उनमें से एक है। मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में होता है, यह- गर्भाशय का निचला हिस्सा होता है जो योनि से जुड़ता है। ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) वायरस को इस कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। यह यौन संचारित संक्रमण है।
World Cancer Day: जीवनशैली की ऐसी आदतें बढ़ा देती हैं सर्वाइकल कैंसर का खतरा, कहीं आप भी तो नहीं करते हैं ऐसे काम
सर्वाइकल कैंसर के क्या लक्षण होते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ खास लक्षणों को ध्यान में रखकर इस प्रकार के कैंसर का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। यदि आपको इस तरह के लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके इसकी जांच जरूर करा लें।
- संभोग के बाद, मासिक धर्म के बीच या रजोनिवृत्ति के बाद योनि से अधिक खून बहना।
- योनि से पानीदार रक्तस्राव होना जिसमें दुर्गंध हो सकती है।
- पेल्विक में लगातार दर्द रहना या संभोग के दौरान असामान्य तौर पर दर्द रहना।
आइए उन आदतों के बारे में जानते हैं जो कि सर्वाइकल कैंसर के खतरे को बढ़ा देते हैं।
कई लोगों के साथ यौन संबंध रखना
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यौन संबंधों को लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अधिक लोगों के साथ यौन संबंध रखने वाले लोगों में एचपीवी संक्रमण का खतरा भी अधिक होता है, जिससे सर्वाइकल कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। इतना ही नहीं यह कई प्रकार के अन्य यौन संचारित संक्रमणों के जोखिम को भी बढ़ा देता है।
धूम्रपान और गर्भनिरोधक गोलियों का ज्यादा सेवन
अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं में धूम्रपान की आदत कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है, सर्वाइकल कैंसर उनमें से एक है। इसके अलावा गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
कमजोर इम्युनिटी वालों में खतरा अधिक
यदि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है और आपको एचपीवी संक्रमण हो जाता है तो सर्वाइकल कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में एचपीवी के अलावा कई अन्य तरीके के संक्रमण और इसके कारण होने वाली जोखिमों का खतरा भी अधिक हो जाता है। यही कारण है सभी लोगों को उन उपायों की सलाह दी जाती है जो इम्युनिटी को बढ़ावा देने में सहायक माने जाते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।
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