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World Brain Day 2025: मस्तिष्क की सेहत के लिए नुकसानदायक होती हैं ये आदतें, आप भी तो नहीं कर रहे हैं ये गलती

Mon, 21 Jul 2025 07:47 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Mon, 21 Jul 2025 07:47 PM IST
सार

हमारा मस्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण और जटिल अंग है, जो हमारी सोच, भावनाओं, याददाश्त और हर शारीरिक क्रिया को नियंत्रित करता है। अक्सर हम जानें अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जिसका नकारात्मक प्रभाव हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है। आइए जानते हैं।

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World brain day 2025 These habits are harmful for brain health, are you also making this mistake
मस्तिष्क - फोटो : Adobe stock photos

How to Keep Brain Healthy: हर साल 22 जुलाई को वर्ल्ड ब्रेन डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य मस्तिष्क स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। हमारा दिमाग सिर्फ सोचने-समझने या याद रखने का काम नहीं करता, बल्कि यह हमारी हर भावना, हर क्रिया और पूरे अस्तित्व को नियंत्रित करता है। यह शरीर का सबसे जटिल और अद्भुत हिस्सा है, जिसकी सही देखभाल बेहद जरूरी है।



हालांकि, अक्सर हम अपनी रोजमर्रा की कुछ आदतों से जानें-अनजाने में ही इसे नुकसान पहुंचाते रहते हैं। बदलती जीवनशैली के साथ, डिमेंशिया, स्ट्रोक और अल्जाइमर जैसी मस्तिष्क संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। इस वर्ल्ड ब्रेन डे 2025 पर आइए उन चार प्रमुख आदतों के बारे में जानते हैं, जो हमारे मस्तिष्क के लिए बेहद हानिकारक हो सकती हैं।

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मस्तिष्क की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और चीनी का सेवन
आजकल की डाइट में अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और अतिरिक्त चीनी का सेवन हमारे मस्तिष्क के लिए धीमा जहर साबित हो सकता है। प्रोसेस्ड फूड में अक्सर अनहेल्दी फैट, सोडियम और एडिटिव्स होते हैं, जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

वहीं ज्यादा चीनी का सेवन न केवल वजन बढ़ाता है और डायबिटीज का खतरा पैदा करता है, बल्कि यह मस्तिष्क के कार्य को भी सीधे प्रभावित करता है। अधिक चीनी का लेवल मस्तिष्क में इंसुलिन प्रतिरोध पैदा कर सकता है, जिससे संज्ञानात्मक क्षमता जैसे याददाश्त और सोचने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है।

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धूम्रपान के नुकसान - फोटो : Freepik.com

धूम्रपान और शराब का सेवन
धूम्रपान और शराब का सेवन दोनों ही मस्तिष्क के लिए बेहद विनाशकारी होता है। धूम्रपान से रक्त वाहिकाएं संकरी हो जाती हैं और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन व पोषक तत्वों का प्रवाह कम हो जाता है। यह स्ट्रोक, डिमेंशिया और मस्तिष्क में रक्तस्राव का खतरा बढ़ाता है।

धूम्रपान मस्तिष्क की कोशिकाओं को भी सीधे नुकसान पहुंचाता है और संज्ञानात्मक गिरावट को तेज करता है। इसी तरह, शराब का सेवन मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट करता है, जिससे याददाश्त में कमी, एकाग्रता में दिक्कत और संतुलन बिगड़ सकता है। यह वर्निक-कॉर्साकॉफ सिंड्रोम जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकता है, जो विटामिन बी1 की कमी से जुड़ी है।

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नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock

पर्याप्त नींद न लेना और क्रॉनिक तनाव
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पर्याप्त नींद न लेना एक आम समस्या है, जो हमारे मस्तिष्क के लिए बेहद हानिकारक है। नींद के दौरान मस्तिष्क खुद को डिटॉक्स करता है और यादों को मजबूत करता है। नींद की कमी से मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, याददाश्त कमजोर होना, मूड स्विंग्स और निर्णय लेने की क्षमता में कमी आती है।

इसी तरह, क्रॉनिक तनाव भी मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है। लगातार तनाव से कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, जो मस्तिष्क के हिप्पोकैंपस (याददाश्त और सोचने से जुड़ा हिस्सा) को सिकोड़ सकता है, जिससे डिप्रेशन, चिंता और याददाश्त संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।

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थकान - फोटो : Freepik
शारीरिक गतिविधि की कमी और सामाजिक अलगाव
एक गतिहीन जीवनशैली जिसमें शारीरिक गतिविधि की कमी होती है, न केवल शरीर, बल्कि मस्तिष्क के लिए भी हानिकारक होता है। व्यायाम ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है, जो मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को बेहतर ढंग से पहुंचाता है। शारीरिक गतिविधि की कमी से मस्तिष्क में नए न्यूरॉन्स के बनने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

इसके अलावा, सामाजिक अलगाव भी मस्तिष्क स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। मानव मस्तिष्क सामाजिक संपर्क के लिए बना है। सामाजिक गतिविधियों की कमी या अकेलापन डिप्रेशन, चिंता और यहां तक कि डिमेंशिया के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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