अल्जाइमर, मस्तिष्क से संबंधित रोग है, जिसका खतरा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है। डॉक्टर्स बताते हैं, 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में अल्जाइमर रोग होने का जोखिम अधिक रहता है, वैश्विक स्तर पर 5 करोड़ से अधिक लोग इस गंभीर समस्या के शिकार हैं। इससे बचाव के लिए युवावस्था से ही सभी लोगों को प्रयास करते रहना चाहिए। अल्जाइमर रोग के लक्षण, कारण और बचाव के बारे में जानना और प्रयास करते रहना आपको भविष्य में इस समस्या से सुरक्षित रखने में मददगार हो सकता है।
World Alzheimer's Day 2023: अकेलापन-लोगों से कम मेल जोल बढ़ा सकता है अल्जाइमर का खतरा, कैसे रहें इससे सुरक्षित
अकेलापन और अल्जाइमर रोग का खतरा
अकेलापन महसूस करना संज्ञानात्मक गिरावट और अल्जाइमर रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में अकेलेपन और उसके कारण मस्तिष्क में होने वाले परिवर्तनों के बारे में बताया गया है।
शोधकर्ताओं ने इसके लिए लगभग 2,300 लोगों को शामिल किया। 10 वर्षों तक किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि जिन प्रतिभागियों को अकेलेपन की समस्या थी उनमें से 22% में अल्जाइमर-डिमेंशिया का निदान किया गया। 60 से 79 वर्ष की आयु वालों में अकेलेपन के कारण इस रोग का खतरा तीन गुना अधिक देखा गया।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
अध्ययनकर्ता कहते हैं, अकेलापन एक व्यक्तिपरक भावना है, ये अपने आप में नैदानिक बीमारी तो नहीं है, लेकिन इसके कारण कई प्रकार के नकारात्मक स्वास्थ्य जोखिम जरूर देखे जाते रहे हैं। लोगों से कम मेल-जोल, रिश्तों में गड़बड़ी के कारण होने वाला अकेलापन समय के साथ मस्तिष्क के लिए समस्याकारक हो सकता है, जिससे अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
मनोचिकित्सा-फार्माकोलॉजी चिकित्सा विज्ञान के प्रोफेसर और शोधकर्ता वेंडी किउ कहते हैं, इंसानी प्रकृति अकेले रहने वाली नहीं है, इसके कारण मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ता देखा गया है। अल्जाइमर रोग से बचाव के लिए सभी लोगों को प्रयास करते रहना चाहिए।
बनाएं मजबूत रिश्ते
अध्ययनों से संकेत मिलता है कि मजबूत सामाजिक संबंध बनाए रखने, अच्छी दोस्ती वाले लोगों में उम्र बढ़ने के साथ मानसिक स्वास्थ्य के ठीक रखने की संभावना अधिक होती है। ये संज्ञानात्मक गिरावट और डिमेंशिया के जोखिमों को भी कम करने में मददगार है। विशेषज्ञ कहते हैं, अच्छे रिश्ते और सामाजिक संबंध, मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संबंधों को ठीक रखते हैं और डिमेंशिया जैसे रोगों के जोखिमों को कम करने में भी सहायक हो सकते हैं।
लाइफस्टाइल को रखिए ठीक
हार्वर्ड विशेषज्ञ कहते हैं, अल्जाइमर-डिमेंशिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए लाइफस्टाइल को ठीक रखना भी बहुत महत्वपूर्ण है। स्वस्थ आहार, अच्छी नींद, रोजाना व्यायाम की आदत न सिर्फ इन रोगों के खतरे को कम करती है साथ ही यह संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से कम से कम 30 मिनट का व्यायाम करते हैं उनमें अल्जाइमर जैसे बीमारियों का खतरा कम होता है।
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स्रोत और संदर्भ
loneliness and dementia risk
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