देश के तमाम हिस्सों से डेंगू के बढ़ते मामलों की खबरें सामने आ रही हैं। राजधानी दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में डेंगू के कारण हालात बिगड़ गए हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक इस बार रोगियों में डेंगू के दो बेहद खतरनाक प्रकारों का निदान किया जा रहा है, जिसने चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एडीज मच्छरों के काटने के कारण होने वाले इस रोग में ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगते हैं, गंभीर स्थितियों में यह रोगी की मौत का भी कारण बन सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक डेंगू से सुरक्षित रहने के लिए मच्छरों से बचाव करना बहुत आवश्यक होता है। पर क्या आपको भी अन्य लोगों की तुलना में मच्छर ज्यादा काटते हैं?
डेंगू का खतरा: ऐसे लोगों को ज्यादा काटते हैं मच्छर, जानिए कैसे रहें इस गंभीर रोग से सुरक्षित?
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अध्ययन में इन दो कारणों का जिक्र
साल 2014 में 'टाइम' मैगजीन में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई जिसमें दावा किया गया कि ऐसा हो सकता है कि कुछ लोगों को मच्छर ज्यादा काटते हों, इसके लिए दो कारणों को जिम्मेदार माना जा सकता है। फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के चिकित्सा कीटविज्ञानी डॉ जोनाथन डे बताते हैं मच्छरों के ज्यादा काटने को दो कारण हो सकते हैं, पहला लैक्टिक एसिड और दूसरा ब्लड ग्रुप।
जिन लोगों की त्वचा से लैक्टिक एसिड का उत्पादन अधिक होता है, उन्हें मच्छर ज्यादा काटते हैं।
'ओ' ब्लड ग्रुप वालों को ज्यादा काटते हैं मच्छर
अध्ययन के आधार पर डॉ डे बताते हैं, ऐसे प्रमाण मिले हैं कि जिन लोगों का ब्लड ग्रुप 'ओ' होता है उन्हें मच्छर ज्यादा काटते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके मच्छर काटने वाले लक्ष्य की पहचान करते हैं। त्वचा से कार्बन डाइऑक्साइड निकलता है जो मच्छरों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। माना जाता है कि 'ओ' ब्लड ग्रुप वाले लोगों की त्वचा अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को रिलीज करती है। ऐसे में डेंगू के इस समय में इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता होती है।
डेंगू का बढ़ते खतरे को लेकर रहें अलर्ट
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक देश में इस बार दो खतरनाक तरह के डेंगू के रूप की पहचान की गई है, जिससे सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
- पहला- डेंगू सीरोटाइप-2 (DEN-2), इस प्रकार के डेंगू के कारण रक्तस्रावी बुखार होता है। रोगियों का तेजी से ब्लड प्रेशर गिरने लगता है जिससे शॉक लगने या मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा नाक से खून आने या त्वचा के नीचे से खून जमने की समस्या भी हो सकती है।
- दूसरा- एफेब्रिल डेंगू, इस तरह के डेंगू में बुखार तो नहीं होता है हालांकि रोगी के प्लेटलेट्स में तेजी से गिरावट आने लगती है। इस प्रकार के डेंगू को ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसमें रोगी को तब तक इस बारे में पता नहीं चल पाता है जब तक उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब नहीं हो जाती।
कैसे रहें डेंगू से सुरक्षित?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू से सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है- मच्छरों से बचाव करना। इस मौसम में सभी लोगों को पूरी बाजू के कपड़े पहनकर रखने चाहिए। इसके अलावा घर के आस-पास मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव करें, खाली बर्तनों में पानी जमा न होने दें और रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। डेंगू के खतरे से बचे रहने कि लिए इम्यूनिटी को मजबूत करने के उपाय करना भी जरूरी है।
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नोट: यह लेख साल 2014 में टाइम मैगजीन में छपे अध्ययन और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।