काफी बहस के बाद मोनिका ने आखिरकार घर छोड़कर अपने मां-बाप के घर जाने का फैसला ले लिया। उनके पति इडुआर्डो लगातार मास्क पहनने से इंकार करते रहे हैं। इसलिए मोनिका ने फैसला लिया कि वो अपने सात साल के बेटे के साथ अपने मायके चली जाएंगी। मोनिका ब्राजील की राजधानी रियो डि जेनेरियो के एक करीब के शहर नितेरोई में अपने परिवार के साथ रहती हैं। अमेरिका के बाद ब्राजील दुनिया का दूसरा ऐसा देश है जहां कोरोना के संक्रमण से सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं।
कोरोना वायरस: महामारी के दौर में भी पुरुष मास्क पहनने से परहेज क्यों करते हैं?
जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक ज्यादातर देशों में जहां के आकड़े उपलब्ध है, मौत की दर पुरुषों में ज्यादा देखी गई है। हालांकि अध्ययनों और सर्वे से पता चला है कि पुरुष महिलाओं की तुलना में सुरक्षात्मक उपकरणों और मास्क पहनने से परहेज कर रहे हैं। पिछली महामारियों के दौरान भी पुरुषों में यही रवैया देखा गया था।
कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए मास्क पहनने की सलाह व्यापक तौर पर स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा दी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भी कहा है कि "मास्क पहनना कोरोना के संक्रमण को बढ़ने से रोकने की एक व्यापक रणनीति है।" हालांकि डब्लूएचओ ने कपड़े या फिर ग़ैर-मेडिकल मास्क के प्रभाव को लेकर कहा है कि इनका असर को लेकर पर्याप्त प्रमाण नहीं है, इसलिए जब सोशल डिस्टेंसिंग संभव नहीं हो तब ही इसका इस्तेमाल किया जाए।
पूर्वाग्रह का मामला
तो अगर मास्क की मदद से कोरोना के संक्रमण को कम किया जा सकता है तो फिर पुरुष इसे पहनने से परहेज क्यों करते हैं? मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के सीनियर लेक्चरर वैलेरियो कैपरैरो और बर्कले के मैथेमैटिकल साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट की कैनेडियन गणितज्ञ हेलेनी बार्सिलो का पुरुषों के व्यवहार को लेकर बहुचर्चित विश्लेषण प्रकाशित हुआ है।
इन दोनों ही विशेषज्ञों ने अमेरिका में रह रहे करीब 2,500 लोगों पर एक सर्वे किया और पाया कि पुरुष ना सिर्फ महिलाओं की तुलना में मास्क पहनने को लेकर हिचकते हैं बल्कि यह भी मानते हैं कि "यह कमजोरी की निशानी है और कूल नहीं है।" वैलेरियो कैपरैरो बताते हैं कि, "यह खासतौर पर उन देशों में रवैया है जहां चेहरा ढकना अनिवार्य नहीं किया गया है।"
इस सर्वे में देखा गया है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में दोगुनी संख्या में इस बात के समर्थन में थीं कि जब "वो घर से बाहर निकलेंगी तो मास्क पहनेंगी।" "पुरुषों का यह भी मानना था कि वो महिलाओं की तुलना में संक्रमण से कम प्रभावित होंगे। जबकि विडंबना यह है कि अधिकारिक आकड़े यह दिखाते हैं कि कोरोना वायरस वाकई में पुरुषों को महिलाओं की तुलना में ज्यादा प्रभावित करते हैं।"
दूसरे कुछ अध्ययनों में यह भी पता चला है कि पुरुष हाथ धोने को लेकर भी महिलाओं की तुलना में कम सकारत्मक रुख अपना रहे हैं। हाल में हुए पोल में यह बात सामने आई है कि 65 फीसदी महिलाओं ने जहां माना है कि वो नियमित तौर पर हाथ धो रही है तो वहीं महज 52 फीसदी पुरुषों ने हाथ धोने की बात मानी है।
राजनीति से प्रभावित व्यवहार
कैपरैरो और बार्सिलो का अध्ययन अमेरिका में हुए सर्वे पर आधारित है। हाल के हफ्तों में यह साफ हुआ है कि महामारी के दौरान पुरुष और महिलाएं कैसे व्यवहार करते हैं, ये राजनीति से बहुत गहरे से प्रभावित हो रहा है। कई सर्वे में यह बात सामने आई है कि डोनाल्ड ट्रंप के रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों की तुलना में मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग के पालन में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। लेकिन इस मामले में भी जेंडर के आधार पर फर्क देखा गया है। रिपब्लिकन पार्टी की 68 फीसद महिला समर्थकों ने घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनने का समर्थन किया है जबकि सिर्फ 49 फीसद पुरुषों ने इस पर हामी भरी है।