क्या आपको भी सुबह उठते ही जोड़ों में अकड़न महसूस होती है, सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में दर्द होता है और घुटनों से कट-कट की आवाज आती है? अगर हां तो इन संकेतों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। ये हड्डियों की समस्या की तरफ इशारा हो सकता है। कई बार इसके पीछे शरीर में लंबे समय तक बनी रहने वाली क्रॉनिक इंफ्लेमेशन भी जिम्मेदार हो सकती है।
Arthritis: आर्थराइटिस में दवा जैसी असरदार हो सकती है ये डाइट, इंफ्लेमेशन की कर देती है छुट्टी
आर्थराइटिस के मरीजों में जोड़ों की सूजन और दर्द को पूरी तरह केवल दवाओं के भरोसे नियंत्रित करना हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे में विशेषज्ञ दवाओं के साथ जीवनशैली और खानपान में बदलाव की भी सलाह देते हैं।
पहले जानिए एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट क्या है?
आहार विशेषज्ञ कहते हैं, एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट में ऐसी चीजें शामिल की जाती हैं जो शरीर में सूजन को कम करने में मददगार होती हैं।
- इसमें ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और सीड्स को शामिल किया जाता है।
- ये खाद्य पदार्थ एंटीऑक्सीडेंट्स, फाइबर, विटामिन्स और मिनरल से भरपूर होते हैं जो कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद करते हैं।
- वहीं इस डाइट प्लान में प्रोसेस्ड फूड्स, मीठे पेय और ट्रांस फैट वाली चीजों से परहेज किया जाता है, जिससे शरीर में सूजन को कम किया जा सके।
इंफ्लेमेशन होती क्यों है?
इंफ्लेमेशन शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली है। चोट, संक्रमण या किसी हानिकारक तत्व के प्रवेश पर प्रतिरक्षा तंत्र सूजन पैदा करता है ताकि शरीर खुद को ठीक कर सके।
- हालांकि जब यह प्रक्रिया लंबे समय तक बनी रहती है तो इसे क्रॉनिक इंफ्लेमेशन कहते हैं।
- मोटापा, धूम्रपान, तनाव, नींद की कमी, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
- लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को बढ़ाती है।
- ये आर्थराइटिस में जोड़ों की सूजन और दर्द को भी बढ़ा देती है।
एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट से आर्थराइटिस ठीक हो सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते है, कोई भी डाइट आर्थराइटिस को पूरी तरह ठीक नहीं कर सकती। एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट सूजन कम करने, दर्द और अकड़न में राहत देने में मदद कर सकती है लेकिन इसे गठिया का इलाज नहीं माना जा सकता।
- एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट के साथ दवाओं, फिजियोथेरेपी और नियमित व्यायाम की मदद से लक्षणों में आराम पाया जा सकता है।
डॉक्टर कहते हैं, आर्थराइटिस के जोखिमों को कम करने के लिए वजन को कंट्रोल रखना भी बहुत जरूरी है। वजन कम करने से घुटनों और कूल्हों पर दबाव घटता है। इससे दर्द और चलने-फिरने में होने वाली परेशानी कम हो सकती है। संतुलित डाइट और नियमित व्यायाम के साथ एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट गठिया के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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