भारत में कैंसर का खतरा पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ते देखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग हर उम्र के व्यक्तियों में कैंसर का निदान किया जा रहा है। साल 2022 में, भारत में 14.1 लाख से अधिक नए कैंसर मामले सामने आए और इस बीमारी के कारण 9.1 लाख से अधिक मौतें हुईं। देश में स्तन कैंस के केस सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए गए।
World Cancer Day 2024: पुरुषों में फेफड़े-महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले सबसे अधिक, WHO ने दी बड़ी चेतावनी
इन कैंसर के मामले सबसे अधिक
रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों में होंठ, ओरल कैविटी और फेफड़ों के कैंसर के मामले सबसे अधिक देखे जा रहे हैं, वहीं महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर के केस सबसे आम देखे गए हैं। नए कैंसर के मामलों में 27 फीसदी केस स्तन कैंसर जबकि 18 प्रतिशत मामले सर्वाइकल कैंसर के देखे गए हैं।
रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा है कि अगले 5 वर्षों के भीतर और अधिक लोगों में कैंसर का निदान हो सकता है।
पुरुषों-महिलाओं में कैंसर का जोखिम
वैश्विक स्तर पर, एजेंसी ने 2 करोड़ नए कैंसर मामलों और 97 लाख मौतों का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 5 में से 1 व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर हो सकता है और लगभग 9 में से 1 पुरुष और 12 में से 1 महिला की इस बीमारी से मृत्यु हो जाती है।
भारत में, 75 वर्ष की आयु से पहले कैंसर होने का जोखिम 10.6 प्रतिशत आंका गया था, जबकि इसी उम्र तक कैंसर से मरने का जोखिम 7.2 प्रतिशत पाया गया था। वैश्विक स्तर पर ये जोखिम क्रमशः 20 प्रतिशत और 9.6 प्रतिशत है।
फेफड़ों के कैंसर से मौत का जोखिम अधिक
कैंसर को लेकर जारी किए गए डेटा के विश्लेषण में पाया गया कि फेफड़े का कैंसर सबसे आमतौर पर होने वाला कैंसर (कुल नए मामलों का 12.4 प्रतिशत) और कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण भी है। ये कुल कैंसर से होने वाली मौतों का लगभग 19 प्रतिशत है। विशेषज्ञों ने कहा, एशिया में तंबाकू का अधिक सेवन के कारण फेफड़ों के कैंसर का जोखिम काफी तेजी से बढ़ा है।
आईएआरसी ने पाया कि वैश्विक स्तर पर महिलाओं में स्तन कैंसर दूसरा सबसे आम तौर पर होने वाला कैंसर है।
सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर अलर्ट
अगस्त 2020 में, विश्व स्वास्थ्यसभा ने सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए वैश्विक रणनीति अपनाई थी। शोधकर्ताओं ने कहा, 15 साल की उम्र से पहले लड़कियों को ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) का टीका लगाने, 35 साल की उम्र तक 70 प्रतिशत महिलाओं की स्क्रीनिंग की मदद से सर्वाइकल कैंसर के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि लाइफस्टाइल-आहार में सुधार के साथ समय पर लक्षणों की पहचान, स्क्रीनिंग और उपचार के माध्यम से दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। यह गंभीर बीमारी है जिसको लेकर सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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