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Surrogacy: आसान शब्दों में यहां समझें क्या होती है सरोगेसी और कौन होते हैं जैविक माता-पिता?
जब एक कपल शादी के बंधन में बंधता है, तो उनका जीवन पूरी तरह बदल जाता है। लेकिन कहते हैं जीवन में सबसे बड़ा सुख तब मिलता है, जब कोई कपल माता-पिता बनता है। बच्चे के आगमन से घर में खुशियां तो आती ही हैं, साथ ही माता-पिता बनने के बाद दंपत्ति का जीवन पूरी तरह बदल जाता है। एक मां अपने बच्चे को 9 महीने तक अपने पेट में रखती हैं, और तब कहीं जाकर बच्चे का जन्म होता है। लेकिन इन सबके बीच सरोगेसी से बच्चे को जन्म देने का सिलसिला भी जारी है। देसी गर्ल के नाम से मशहूर बॉलीवुड-हॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा सरोगेसी से मां बनी हैं, जिसकी जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर दी। वहीं, क्या आप जानते हैं कि सरोगेसी होता क्या है? शायद नहीं, तो चलिए हम आपको इस बारे में बताते हैं।
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क्या होता है सरोगेसी
- फोटो : istock
क्या है सरोगेसी?
दरअसल, इसमें कोई कपल किसी महिला की कोख को बच्चा पैदा करने के लिए किराए पर ले सकता है। इसमें महिला अपने या फिर डोनर के एग्स के जरिए किसी दूसरे कपल के लिए गर्भवती होती है। जो महिला बच्चे को जन्म देती है और जो कपल सरोगेसी करवा रहे हैं, उनके बीच एक एग्रीमेंट होता है। इसके तहत होने वाले बच्चे के कानूनन माता-पिता सरोगेसी करवाने वाला कपल ही होता है।
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क्या होता है सरोगेसी
- फोटो : istock
सरोगेसी दो तरह की होती है
पहली
सरोगेसी भी दो तरह की होती है, पहले में होने वाले पिता या डोनर का स्पर्म सरोगेसी अपनाने वाली महिला के एग्स से मैच कराया जाता है। इस सरोगेसी को ट्रेडिशनल सरोगेसी कहते हैं। इसमें सरोगेसी में सरोगेट मदर ही बॉयोलॉजिकल मदर यानी जैविक मां होती है।
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क्या होता है सरोगेसी
- फोटो : Pixabay
दूसरी
जेस्टेशनल सरोगेसी में सरोगेट मदर का बच्चे से संबंध जेनेटिकली नहीं होता है। इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि इसमें प्रेग्नेंसी में सरोगेट मदर के एग का इस्तेमाल नहीं होता है। सरोगेट मदर बच्चे की बायोलॉजिकल मां नहीं होती है, और वो सिर्फ बच्चे को जन्म देती है। इसमें पिता (होने वाले) के स्पर्म और मां के एग्स का मेल या डोनर के स्पर्म और एग्स का मेल टेस्ट ट्यूब के जरिए कराने के बाद इसे सरोगेट मदर के यूट्रस में प्रत्यारोपित किया जाता है।
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क्या होता है सरोगेसी
- फोटो : Pixabay
इन वजहों से हो सकती है सरोगेसी
सरोगेसी से बच्चे को जन्म देने के पीछे वैसे तो कई वजहें हो सकती हैं। लेकिन इनमें जो साफ नजर आती हैं वो हैं कपल के बच्चे न हो पाना, गर्भधारण करने से महिला की जान को खतरा आदि। जो महिला अपनी कोख में किसी दूसरे का बच्चा पालती है, वो सरोगेट मां कहलाती है।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
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